भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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और राजकुमार बैठे हैं, राजकुमारी माला लिये फिर रही है। नारदजी भी रङ्गभूमिमें पहुँचे, जाकर एक आसन पर विराजमान हुये मनमें लगी थी कि, राजकुमारी मेरेही गलेमें जैमाल डाले, पर राजकुमारी फिरते २ जैसे नारदजीके सम्मुख आई वैसेही पिछले पाँव फिर कर दूसरी ओर चली गई। नारदजी अपने आसनसे उठकर राजकुमारीके सम्मुख जा बैठे। राजकुमारी उनको देखतेही उधरसे भी लौटी। अब तो नारदजीने ऐसा किया कि, राजकुमारी जिधर २ जाती उधरही उधर उसके सम्मुख जा बैठते राजकुमारी भी विचित्र बन्दर मुखवाले पुरुषको देखकर घृणासे दूसरी ओर फिर जाती। इतनेहीमें विष्णु भगवान भी राजाके स्वरूपमें आकर रङ्गभूमिमें उपस्थित हुये। राजकुमारीने जैसेही भगवानको देखा वैसेही माला पहनादी। नाना प्रकारके बाजन बजने लगे, बड़े उत्साह और आनन्द पूर्वक भगवानके साथ राजकुमारीका विवाह हो गया, भगवान् उसे साथ लेकर वैकुण्ठको गये। भगवानके चले जाने पर नारदने निराश होकर मनमें बहुत क्रोधित हो चलनेका विचार किया। नारदजीकी व्याकुलता और क्रोधसे क्षण क्षणमें मुखका रङ्ग बदलते देखकर शिवके गणोंने, कहा कि, महाराज आपका मुंह तो देखिये! आरसी न मिले तो जलमें देखो। नारदजीने जाकर जलमें मुखको देखा। कुरूप बन्दरकासा रूप देखकर अत्यन्त क्रोधित हुये। क्रोधसे उन दोनों शिवके गणोंकी ओर देखा। कहा कि, हे मूर्खों! तुम लोगोंने जान बूझकर न कहा मेरा ठट्ठा किया जिससे मेरी अप्रतिष्ठा हुई तुम लोगोंने जानकर मेरी प्रतिष्ठा नष्ट की है, इस कारण तुम दोनों राक्षस होगे बन्दरोंसे तुम्हारी दुर्दशा होगी। फिर नारदजी क्रोधसे झुंझलाते हुये विष्णु-भगवानके पास चले। जाते जाते राहमेंही राजकुमारी सहित विष्णु भगवान् मिल गये देखतेही क्रोधके आवेश में आकर शाप दिया कि, हे विष्णु! जैसे तूने मेरे साथ छल किया है, मुझे स्त्रीका वियोग कराया उसी प्रकार तू भी मनुष्य का शरीर धारण करेगा, तेरी स्त्रीका हरण होगा, जिसके लिये बनबन रोता फिरेगा, विरहसे व्याकुल होगा, मेरा मुख बन्दरोंकासा बनाया है इस कारण बन्दरोंकाही आसरा लेना पड़ेगा, उनके बिना तेरा काव्य सिद्ध न होगा। नारदजीके इसी शापके अनुसार रामावतार हुआ, रावणने सीताका हरण किया, फिर बन्दरोंकी सहायतासे रावणको जय किया।

मायानगर—जिस नगर में यह हाल हुआ था वह श्रीनगरके नामसे प्रसिद्ध है। कोई २ कहते हैं कि, काश्मीरकी राजधानी श्रीनगर वही मायावी शहर है। कोई कहते हैं कि, ब्रह्मनारायणके मार्गमें जो श्रीनगर नामक नगर है