भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1190

महादेव आसुरी सम्प्रदायके आचार्य हैं, उनके द्वारा मुक्ति नहीं मिल सकती। हाँ यदि कोई शंख भी पाप कर्मोंसे रहित हो, पुण्यमें प्रवेश कर, दैवी सम्प्रदायको धारण करे तो समय पाकर अवश्य मुक्तिका अधिकारी हो सकता है। नहीं तो, जबतक शिवका आसरा करेगा आवागमनमें रहेगा, प्रकाशका मार्ग नहीं प्राप्त कर सकेगा।

सिंहावलोकन।

संसारमें जितने धर्म (मजहब) हैं सबके प्रवर्तक शिव और विष्णु हैं। ये दोनों देवते निरञ्जनकी ओरसे संसारमें वेद और किताबको प्रचलित करने के लिये नियत किये गये हैं। येही दोनों ब्रह्माण्डोंका प्रबन्ध करते हैं, इनके साथ सहायतामें ब्रह्मा भी रहते हैं, पर ब्रह्माकी पूजा कहीं नहीं होती। क्योंकि, इनको आद्याका शाप हो चुका है। इन देवोंमें विष्णु महाराज श्रेष्ठ हैं, येही सब संसारके कर्ताके नामसे पूजे जाते हैं। यह बात मैं प्रथम सिद्धकर आया हूँ कि, भारतवासी प्रगटहो विष्णुको पूजते हैं। अन्य योरप आदि देशवालेभी जिसका पूजन करते हैं जिसको ईश्वर मानते हैं वह भी विष्णुकाही रूपान्तर है। अरबके लोगोंके आँखोंपर पक्षपातका पर्दा पड़ा है पर मैंने पर्दा उघाड़कर कह दिया है जिसको मानना हो माने, न मानना हो तो उसकी इच्छा। इन्हीं विष्णु भगवान्की संसारमें पूजा हो रही है, दूसरा कोई नहीं है।

जो आदमका खुदा था वही इब्राहीम और मूसा आदिकका खुदा था। इब्राहीमकी संतानमें चालीस सहस्र पँगम्बर हुए,। सब उसी एक खुदाकी भक्ति करते आये। मुहम्मदतक जो अन्तिम पँगम्बर हुये सब उसीकी साक्षी भरते आये।

कुरान्सूरे उमरान ८३ आ० ३ सि० ९ रु.

قُلْ آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنْزِلَ عَلَيْهِ وَأَنزَلَ عَلَيَّ الْكِتَابَ

इसका अर्थ—तू कह—हम ईमान लाये अल्लाहपर जो कुछ उत्तरा हम पर इब्राहीम इस्माईल, इसहाक, याकूब, तथा उसकी सन्तान पर जो कुछ मिला मूसा, ईसा और सब नबियोंको खुदाकी ओरसे, हम भिन्न नहीं करते उनमेंसे किसीको हम भी उसीकी आज्ञामें हैं।

इसी प्रकारसे सब मनुष्य उसी खुदाकी भक्ति करते हैं। कोई किसी प्रकारकी बुद्धि विद्या और युक्ति क्यों न खर्च करे पर इन तीनों देवतोंकी