कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1195, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंबे ख'ब सारेको खब'र देते । कुत्र अ'कशफुल्लोगात हिन्दू हैं ॥
जाने न और अपने अ'स्ल से वस्ल । पाते सो दाव घात हिन्दू हैं ॥
औरकी अकल है न ऐसी र'सा । दीन दुनी मवत्रिसात हिन्दू हैं ॥
बे ख'बर सारे इसम'आजमसे । नाम मुअल्लिममें क'रात हिन्दू हैं ॥
नफसको मारकर मिलावें जो गर्द । बरी' अज तोह'मात हिन्दू हैं ॥
जन्म साबिकमेंकी जो ऐसी अमल । ह'सनःके हासि'लात हिन्दू हैं ॥
साध गुरु सेवकर भजन सुमिरन । देते खुम'स और जु'कात हिन्दू हैं ॥
वे ख'बर कौम सब जमींके ऊपर । वाकिफ़ अज वार'दात हिन्दू हैं ॥
होता हिन्दू है खुश'नसीब आजिज । धरते यम सर पैलात हिन्दू हैं ॥
प्राचीन समयमें भारतवर्ष, बड़ा प्रतापी और सर्व सम्पत्ति सम्पन्न देश था । इसके क्षत्रिय शूर बीरोंसे संसार भरके यीद्धा भय खाते हुए इनका लोहा मानते थे । किसीकी समर्थ नहीं थी कि, भारतपर आक्रमण कर सके । श्री महाराजा रामचन्द्रजीके समयमे बरबर देशके म्लेच्छोंने एका एक करके भारत पर आक्रमण किया था पर महाराजाने मार भगाया । इसीप्रकार अनेकबार विदेशियोंने इस पवित्र भूमिपर आक्रमण किया पर कभी सफलताका मुंह नहीं देखा ।
मुसलमानोंके अत्याचार ।
अढाई सहस्र वर्षसे देशके भाग्यने पलटा खाया, सिकन्दरसे लेकर महमूद गजनबी तक अनेक म्लेच्छ राजाओंने आक्रमण किया, क्रमशः मुसलमानोंका राज्य हो गया, मुसलमान बादशाहोंने भारतवासियोंपर बहुत अत्याचार किया, आलमगीर, औरंगजेब ( आदिकोने लाखों हिन्दुओंका वध किया । इनके धर्म-धर्मपुस्तकों धर्मस्थानों तथा मन्दिरोंपर ऐसा अत्याचार किया, जिसके वर्णनसे मनुष्यके रोम खड़े होते हैं । इसके अत्याचारसे लाखों हिन्दुओंने आत्महत्या की पर धर्म न छोड़ा ।
हिन्दुओंकी दृढता—विचारनेकी बात है कि, इन लोगोंने हिंदुओंको इमानदार बनाया कि, वे इमान ? वे स्वयम् कैसे थे ? जो लोग हिन्दुओंको पुण्यात्मा और इमानदार बनाना चाहते थे अथवा चाहते हैं वे स्वयम् अपनी ओर
१ अचेत, २ चेत, ३ भेदोंका कोश अर्थात् सारभेद जाननेवाला, ४ असल जाननेवाला, ५ असल, ६ पहुँचा हुआ, ७ सार नाम, ८ ईश्वरी भेदके शिक्षक । ९ विषयासक्त मन, १० रहित, ११ दोष, अवगुण, १२ उत्तम प्रशंसनीय, १३ प्राप्त करनेवाले, १४ ईश्वरार्पण दान पुण्य, १५ अपने उपाजित धनमेंसे ईश्वरार्थ गुरु आदिको देना, सार भेद, १६ भाग्यवान ।