भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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दृष्टि करके देखें कि, क्या कमाई कर गये तथा करते हैं। म्लेच्छ भला हिन्दुओंको क्या मुक्तिमार्ग बतलावेंगे? स्वयम् तो अन्धकारमें फँसे रहकर सांसारिक तापोंसे तप रहे हैं; दूसरोंको क्या मार्ग बतावेंगे? इन म्लेच्छोंकी क्या सामर्थ्य कि, हिन्दुओंको अपने धर्मसे विचलित कर सके (नीच जातियों, नीच बुद्धिओंकी बात नहीं है।)

हकीक़ तराय।

अच्छे और सच्चे हिन्दुओंने जान तो दे दी पर कभी म्लेच्छोंके धर्मको शब्दोंसे भी स्वीकार नहीं किया। इस पर यह दृष्टांत हकीक़तराय नामक क्षत्रिय बालकका लिखता हूँ। जिससे पाठकगणोंको हिन्दुओंकी धर्म श्रद्धा और दृढ़ता प्रगट हो जाय। हकीक़तराय जातिके क्षत्रिय थे, इनका जन्म १७९१ सम्बत् वि० में आगरा शहरमें हुआ था। इनके पिता धनवान् और साहसी पुरुष थे। किसी कारण इनके पिता इनको साथ लिये हुये पंजाब देशके स्थाल कोट नगर जा रहे। हकीक़तरायकी ७ वर्षकी अवस्था हुई तो इनके पिताने एक मकतबमें विद्या अभ्यासके लिये बैठा दिया। हकीक़तराय दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करते हुये अपनी आयुके बारहवें वर्षमें पहुँचे। नित्य मुसलमान तालिब इल्मों (विद्यार्थियोंके) साथ वाद विवाद हुआ करता था, कभी कभी धार्मिकविषय भी छिड़ जाते थे। एक दिन वाद विवादके बीचमें ही एक मुसलमान लड़केने ज्वालामाईको गाली दी। हकीक़ तरायसे अपनी पूज्य देवीकी निन्दा सुनकर सहन नहीं होसका, उसने भी बीबी फ़ात्माको गाली दी। उस मकतबका शिक्षक मुसलमान था। मुसलमान विद्यार्थियोंने जाकर उससे कहा कि, हकीक़तराय बीबी फ़ात्माको गाली दी है। वह विद्यार्थियोंको लेकर काज़ीके निकट गया। हकीक़तरायकी बहुत शिकायत करके बीबी फ़ात्माको गाली देनेका समाचार कहा। काज़ीने बहुतसे मुल्लोंके साथ मिलकर यह निर्णय किया कि, हकीक़ तरायने पैगम्बर साहबकी पैंटी, बीबी फ़ात्माको गाली दी है, इस कारण यह प्राण दण्डके योग्य है। फिर यह मुकदमा नब्बाब खान बहादुर नामक लाहौरके शासकके पास पहुँचा। नब्बाबके सन्मुख हकीक़तरायने स्पष्ट कहा कि, पहले मुसलमान विद्यार्थियोंने ज्वालामाईको गाली दी तब मैंने पीछे कहा। नब्बाबने चाहा कि, बालक हकीक़तराय न मारा जाय, किसी प्रकार बच जावे पर दुष्ट काज़ी और मुल्लाओंने अपनी बड़ी भारी भीड़ एकट्ठी की, सबने मिलकर नब्बाबसे कहा कि, यदि तुम इस बालकका पक्ष करोगे तो हमलोग बादशाहसे नालिश करेंगे। काज़ियोंकी दुष्टता देख नब्बाब बहुत विवश और दुःखी हुआ।