भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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किनारे ले जाकर उसकी अन्तिम क्रिया की गई, वहाँ उनकी समाधि बनी, साल साल मेला होने लग गया। अब भी मेला होता है, सहस्रों मनुष्य इकट्ठा होते हैं। हकीकतरायके गीत पंजाबमें गाये जाते हैं।

जिसका धर्म वर्त्तमान है उसका सब कुछ है, उसीके लिये सब सुख है, वही लोक परलोकका राजा है। धर्मसे बढ़कर लोक परलोकमें दूसरा कोई पदार्थ नहीं। जिसने अपने धर्मको बचाया, उसके लिये जीवनकी आशा त्याग दी, वही सफल काम हुआ।

अनन्तर हकीकतरायके माता पिता, उनके फूल लेकर, गंगा प्रवाह कराने हरिद्वार गये। वहाँसे लौटनेपर दिल्ली बादशाही दरबारमें पहुँचे। बादशाहसे अपने पुत्रके ऊपर अन्याय और उसके व्यर्थ बधका न्याय चाहा। बादशाहने रातको हकीकतरायको यह कहते हुये स्वप्नमें देखा कि, यदि मेरा न्याय न करोगे तो तुम्हारा गला घोंटकर मार डालूंगा। बादशाह स्वप्न देखकर बहुत भयभीत हुआ। सवेरा होतेही हकीकतरायके माता पिताको बुलाकर सब हाल पूछा। नब्बाब खान बहादुरसे कैंफ़ियत मोंगी, नब्बाबने स्पष्ट उत्तर दे दिया कि, मैं इस बातमें निरपराध हूँ, मेरा तनिक भी दोष नहीं। काज़ी और मुल्लाओंने बलपूर्वक यह काम करवाया है। काज़ी और मुल्ला बुलाये गये, खूब जाँच हो जानेपर, जिन जिन काज़ी और मुल्लाओंने बधकी सम्मति दी थी, उनको एक एक नौकापर चढ़ाकर जमुनामें डुबवा दिया।

जैसे हकीकत रायने बधिकसे कहा था कि, तू स्वर्गको जायगा, उसी प्रकार ईसाके साथ दो चोर सलीनपर चढ़े थे, एक तो हजरतको गाली देता था, दूसरा कहता था ऐ ईसा! तू मेरे ऊपर दया करना, उस समय ईसाने कहा, था कि, तू स्वर्गको जावेगा।

गुरु गोविन्दसिंह गुरु तेगबहादुरके साथ भी ऐसाही हुआ था। गुरु गोविन्दसिंहके दो पुत्र तो युद्धमें मारे गये थे, शेष जो छोटे दो थे उनको लेकर उनकी दादी भागी, एक ब्राह्मणके घरमें शरण ली, जो बहुत दिनोंसे गुरु गोविन्दसिंहकेही नाजसे पलता हुआ सुख भोग रहा था। उस निमकहराम बेइमान ब्राह्मणने दोनों बच्चोंको मुसलमानोंसे पकड़वा दिया। उस बेइमान नीच ब्राह्मणने लोभवश हो ऐसी कृतघ्नता और पाप किया कि, जिसके तुल्य दूसरा कोई पाप नहीं हो सकता। मुसलमानोंने दोनों लड़कोंको पाया, जिनमेंसे एक तो सात वर्षका था दूसरा पांच वर्षका था। कहा कि, तुम मुसलमान हो जाओ