भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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सच्चे हिन्दू और मुसलमान

मुसलमानो हदीस, तारिख मुहम्मदी तथा मौलवी अमाउद्दीन कृत तालीम मुहम्मदीमें लिखा है कि, मुसलमान लोग पहले मदिरा पीते और शूकर-का मांस खाते थे। मद्य पीकर निमाज पढ़ना विधि थी, पीछे हराम (निषेध) हो गया। इसी प्रकार बलपूर्वक मुसलमान करना भी हराम हो गया। मुसलमानोंने दो बातोंका तो हराम मान लिया पर तीसरी बात नहीं मानी। कबीर साहबने कहा है कि—

बाँधे भक्ति न होयरे भाई । बाँधे करे सो करम कसाई ।

जो लोग बलपूर्वक मुसलमान करते हैं वे स्वयम् मुसलमान नहीं हैं जो परवश मुसलमान हुये हैं वे भी मुसलमान नहीं। जो यथार्थमें मुसलमान हैं वे न तो बलपूर्वक मुसलमान करते हैं, न होते हैं।

जो गुण मने हिन्दुओंके ऊपर लिखा है, जिसमें वे गुण होंवे वे ही हिन्दू हैं। देखो हकीकतराय को मुसलमानोंने कितना दुःख दिया, प्राण तक हरण कर लिया पर वीर क्षत्रिय बालकने अपनी धर्म दृढ़ता न छोड़ी। ऐसेही पुरुष हिन्दुओंमें परिगणित होनेके योग्य हैं। जो लोग मुसलमान अथवा ईसाई होगये वे प्रथमही हिन्दू नहीं थे, न मुसलमान अथवा ईसाई, नाम धरानेपर मुसलमान अथवा ईसाई हुये। जैसे गदहेने व्याघ्रका चमड़ा ओढ़ लिया तो क्या? बैलका ओढ़ लिया तो क्या? असलमें वह गदहा ही है। वैसे ऐसे अव्यवस्थित चित्त और धर्मवाले लोगोंका कुछ भी धर्म नहीं होता। उनको धर्म बदलते, गंगादाससे यमुनादास, यमुनादाससे गोमती दास बनते कुछ भी विलम्ब नहीं है। कोई किसी धर्ममें क्यों न हो पर अपने सदाचार और पुण्यसे ही उसका कल्याण होगा क्योंकि ईश्वर एक और सम है, उसकी आज्ञा उलंघन करना पाप और नियमको न छोड़ना पुण्य है। यदि ईश्वरके नियमके विरुद्ध चलेगा तो पापी होकर दण्डका भागी होगा। सदाचरण (ईश्वरी नियम) को ही पूर्णता पर पहुँचाना सर्व धर्मोंका मूल है। जो लोग नीच घृणित मादक पदार्थ और मांस आदि हिंसा प्राप्त पदार्थोंको ग्रहण करते हैं वे भी हिन्दू नहीं हैं। केवल हिन्दुओं के ही लिये यह बात नहीं बरन् जो ईसाई अथवा मुसलमान हैं, इञ्जील तथा कुरानकी आज्ञाओं पर नहीं चलते वे ईसाई या मुसलमान नहीं हो सकते क्योंकि, मुखसे कहना और बात है, मानना और उसके ऊपर चलना और बात है। कोई क्यों न हो? जिनका जो धर्म है, वह धर्म ईश्वरी नियम (प्रकृति) के विरुद्ध न हो, उसको भली प्रकार बर्तनेसे कल्याण प्राप्त करेगा। प्रकाश और श्रेष्ठता सत्य-

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