भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

पृष्ठ 1210, कुल 1367 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1210

सब खाम कोई न पका, कोई न मस्तपर चढ़ सका ।
आजिज भी सबसे कहि थका, साधूकी पूजा उठ गई ॥

गजल ।

दोनों हैं बला बिहिश्त दोज व । उनको है सिला बिहिश्तव दोजख ॥
जिनको न खबर है अपने घरकी । आदम न चला बिहिश्तव दोजख ॥
जो दिल है तमीजो फिक खाली । है सूये बला बिहिश्तव दोजख ॥
मखसूस न यह बइत्र आदम । हैवांको भला बिहिश्तव दोजख ॥
इन्साको पसन्द वह न हरगिज । पुरखौफ़ गला बिहिश्तव दोजख ॥
एरा में आन कर अमल कर । फिर दोनों कला बिहिश्तव दोजख ॥
आवेगी जब यक हवा खिज़ानी । तब आग जला बिहिश्तव दोजख ॥
आदम हुआ बाहर अज अदन बाग । जब रोज़ ढ़ला बिहिश्तव दोजख ॥
खाली हैं ज़मान ज़मीने आजिज । खाक और ड़ला बिहिश्तव दोजख ॥

गजल ।

सोचकर दिलमें बे खबर आदम । छोड़ दे ख़्वाब और खुमर आदम ॥
कौन मजहब तेरा है कौन खुदा । पूजता किसको बे बसर आदम ॥
देख और सोचकर बफ़िक़ो तमीज । यह न मशरब है यह तो शर आदम ॥
जिसको तू पूजता खुदा करके । सो खुदा है न अजदर आदम ॥
भेडिया या भेडका बचो पानी । तुझको है खौफ़ और खतर आदम ॥
जिससे आरामकी उम्मीद तुझे । बेशक उससेही हो जरर आदम ॥
जिस प्यालेकी शौक़से पीता । आब हैवां न वह जहर आदम ॥
जो कि मुहसिन यकीन बाबरकी । करे वह जेर और अबर आदम ॥
जिसको जाना है ख़्वान मकां अपना । वह न हरगिज है तेरा घर आदम ॥
कर इबाबत तिहारतो तकवा । बेंतफ़क्कुर है बे समर आदम ॥
लाख चौरासीमें फ़िरा मारा । अब असल अपना ध्यान धर आदम ॥
देह यह और वक्त यह तेरा । अब जरा दिलमें होश कर आदम ॥
आदमी है तो होश कर आजिज । गर बहायम से हैं तो मर आदम ॥

गजल ।

वक्त गुज़रे पै अपने ग़म कीजे । याद खुद सानये सनम कीजे ॥
जाकर होश पास देख उसे । मुरदः दिल अपना फेर दम कीजे ॥
जिसको तू चाहता वह दूर नहीं । हुम्ब महबूब चश्म नम कीजे ॥
छोड़ दे सब जहानो बुतां पामाल । अपने मह आगे पुश्त खम कीजे ॥