भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

पृष्ठ 1214, कुल 1367 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1214

खाना तुझे एक नान है, दुनियाँमें रोना पीटना ॥
साधुओंकी मुहब्बत नहिं किया, गादम न सो हैवाँ जिया ।
गुरु बात रख नहिं कान है, दुनियाँमें रोना पीटना ॥
हक्का कबीरा यार हो, सब मञ्जिलोंके पार हो ।
तब पाओ अपना मकान है दुनियाँमें रोना पीटना ॥
जब तक यहाँ लोवास है, तबतक नहीं वह पास है ।
कर तर्क मल वह आन है, दुनियाँमें रोना पीटना ॥
सच्चेसे मिलने जाइये, तब आप सच हो जाइये ॥
दिनदोका तू मिहमान है, दुनियाँमें रोना पीटना ॥
मुरशिद हकीकी रहबरी, इसकी उम्मीद आजिज करी ।
सब साहबे सुलतान है, दुनियाँमें रोना पीटना ॥

मुखम्मस तर्जियाबन्द ।

है नहीं बिन्द और नहीं है नाद । सारे जिन्नो परी व आदमज़ाद ॥
आगये काबू कैल जो बेदाद । बोझने की बदी लिया शिर लाद ॥

ऐ फ़िरोतन तुम्हैं मुबारकबाद ।

नहीं कैसे सिकन्दरो बहराम । नहीं दारा रहा नहीं जिस्मजाम ॥
सब शहनशाह मर गये नाकाम । एगरीबे आजिज और दिलनाशाद ॥ऐ०
कहाँ भैरव गया कहाँ हनूमान् । कहाँ अरजुन व भीमसे बलवान् ॥
कहाँ हुकमा व दानये दौरान् । दिल शिकस्तः जिन्हैं खुदा दरयाद ॥ऐ०
कहाँ वे हैं जो परबतां तौलें । और फसाहतसे बोलियां बोलें ॥
कहाँ वे हैं जो रम्जको खोलें । कहा गढ़ लच्छू बाग है शद्वाद ॥ऐ०
नहीं जालिम रहा नहीं मजलूम । नहीं खुशबख्त और नहीं बदशूम ॥
नहीं बुलबुल रहा न ज़ाग और बूम । कहाँ हरनाकश और कहा पहलाद ॥
ऐ मेरे हिज्ज आ खबर लीजे । करम और फ़ज़ल अपना अब कीजे ॥
बखश मेरे गुनाहोंको दीजे । सुने आजिजका मेहरकर फरियाद ॥

ऐ फ़िरोतन तुम्हैं मुबारकबाद ।

मुखम्मस तर्जियाबन्द ।

आ गया यह, अजब ज़माना है । दुनियवी कुल कारखाना है ॥
अल्हे दुनिया वाहिदाना है । एक सा सबको कर दिया तूने ॥