भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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यथा ।

यह धन विद्या पसारा केते दिन को । यह नौबत और नकारा केते दिनको ॥
यह दौलत जाहो-शौकत शानो हशमत । हुआ तेरा अजारा केते दिनको ॥
सिकन्दर हाथ खाली हो सुधारा । वह कैंसर और वारिद केते दिनको ॥
किधर वे जो किये दावै खुदाई । यह मोम और सङ्ग खारा केते दिनको ॥
बकैद तोहमात इन्प्रा बंधा । यह दुनिया दोस्त प्यारा केते दिनको ॥
गुजर जावेगी आजिज दीदनी सब । खयालो खाब सारा केते दिनको ॥

यथा- क्यों जिल्लन निकालता है नादों । दुनियामें बात है शादों ॥
ग्राफिल न हो अस्ल अपनी याद । हर शामो सिंहूर व बइमदादों ॥
खाब और ख्याल कुल आलम । हैवानो नाबत और जमादों ॥
आनन्द तो होवे सङ्ग सुलहा । कर तरक तू मेल बदनिहादों ॥
उम्मीद उससे रख तू आजिज । यकता है जो बखश दिल मुरादों ॥

यथा- आया यहां अज्ञान है, दुनियामें रोना पीटना ।

नहीं अस्ल अपना ध्यान है दुनियामें रोना पीटना ॥
गम और अलमका बहार है, कोई न बरखुरदार है ।
हसता तू क्या नादान है, दुनियामें रोना पीटना ॥
नाच और न कीबकी बोल क्या, नौबत नकारा ढोल क्या ।
आफ़ातकी घमसान है, दुनियामें रोना पीटना ॥
सर पर जो काल कलोलता, मगरूर हो क्या बोलता ॥
जाको अपने व आमान है, दुनियामें रोना पीटना ॥
महरिम नहीं बन बी के, गुरी है दिलमें शेखके ।
पूर दरद चारो खान है, दुनियामें रोना पीटना ॥
काजी मशाय बोलते, इसरार अल्लाह ोलते ।
अन्धा यह बे पहिचान है, दुनियामें रोना पीटना ॥
बेचूँ अलख अल्लाह है, जो कुलका क़िबले गाह है ।
इसको नहीं कोई जान है, दुनियाँमें रोना पीटना ॥
दायम गुनह आलूद है, आना यहां क्या सूद है ।
हर सिम्त खींचोतान है, दुनियाँमें रोना पीटना ॥
होली तमाशा राग है, सो हंस नहीं कोई काग है ।
आदमके नहीं शायान है, दुनियाँमें रोना पीटना ॥
शबरोज मरता बैल है, मेहनत मशक्कत मैल है ॥