भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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नहिं रब्त् सत्सङ्गृत किबा दरियायमें सो डूब है ॥
आजिज यह सब तू छोड दे दुनियासे रिश्तः तोड दे ।
बाग अपनी इनसे मोड दे आशिकको यह मायूब है ॥

उडकर न पार होगा तीतर बटेर भरें ।
आखिर शिकार होगा तीतर बटेर भरें ॥
कुछ सोच फिक् करले तू देख पार परले ।
दिल कब क्रारर होगा तीतर बटेर भरें ॥
आकाश उडके जावे वहां से पकड गिरावे ।
फिर सर ब दार होगा तीतर बटेर भरें ॥
बदबूय सारे आवे वह गुल कहां तु पावै ।
हर जामें खार होगा तीतर बटेर भरें ॥
जहां जाय सब बेगानः नहिं दोस्त और येगानः ।
नहिं विल फिगार होगा तीतर बटेर भरें ॥
आजिजकी गुफ्तगू सुनकर सीख लेवे वह गुण ।
नहिं सङ्गसारोंका तीतर बटेर भरें ॥

जगतके जीव राम क्या जानें । करना क्या है सो काम क्या जानें ॥
घास चरना व बोल हैवानी । भेड बकरा सलाम क्या जानें ॥
दबदबः दिले दिमागो दौलतो जाह । औज शाहां गुलाम क्या जानें ॥
गंदें गुफ्तार सुन हुये गन्दे । पाक साहब कलाम क्या जानें ॥
कैल फर्जन्द आम्बिया सिद्ध साधु । सत साहब पयाम क्या जानें ॥
काल बखशिशमें सब हुये मदहोश । अकबर २ इनाम क्या जानें ॥
जिन कोसिरमें है अकल हैवानी । जिन्दगी इन्तिजाम क्या जानें ॥
जो जमीनके हैं बुजदिलो गेदी । कद्र दारुलमुहाम क्या जानें ॥
झूठमें जगत लग रहा सारा । वस्फु सो सत्य नाम क्या जानें ॥
साधुका भेद कोई जाने साधु । विष्णु ब्रह्मा व बास क्या जानें ॥
दुनियवी आदमी हैं सब अन्धे । काल जज्जाल दाम क्या जानें ॥
अकल और नकल पीरो कुल आलम । अस्लको अकलखाम क्या जानें ॥
जोहरी कोई जान जोहर जो । बे बहा अजदहाम क्या जानें ॥
जिन्दगी बखश गोश नोशिन्दः । कौन साकी व जाम क्या जानें ॥
घर बघर देखिये खोरिश हैवों । कौन इन्सों तआम क्या जानें ॥

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