भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1238

अहल दुनिया दब मरे सारे । सरपर भारी हिजर दिया उलमा ॥
पेटके वासते नचे दिनरात । ख्वाब गुफलत खुमर दिया उलमा ॥
कोई न वेडार सब हुये ग्राफल । राह दिखला देहर दिया उलमा ॥
आब हैवों प्याला को कर दूर । हवस हैवों चर दिया उलमा ॥
रास्ती सूझी और न वृझ कोई । तलक्रीन शैतां सर दिया उलमा ॥

खुलक इनसानसे सब हुये महरूम । राह बतला दिये हरदिया उलमा ॥
अपने खालिकको छोडकर बतला । उन्स जोरु व जर दिया उलमा ॥
होके आदम न पावे सीधी राह । शर सद हरबशर दिया उलमा ॥
दी छिया रास्ती और खोल दरोग । राह उमीद व डर दिया उलमा ॥
कुत्ब और किससा और शरआशीरी । सबक करे व फर दिया उलमा ॥
हर बरारको सो मांगना सिखलाये । भीख रह दर बदर दिया उलमा ॥
सारे टिडी हुये उड़े आस्मां । सबको परवाज पर दिया उलमा ॥
वहां जाकर करार पावे । कौन । जाने चौरासी धर दिया उलमा ॥
कीच कसरत खबर न वहदतकी । मौज मेल मकर दिया उलमा ॥
गोता खावे हजार निकले किधर । वहरमें सद चक्र दिया उलमा ॥
पेटके काममें पचे परपंच । फिक्क व फाका फुक्क दिया उलमा ॥
ऐश व अशरतमें फँस गये आदम । ख्याबखोरिस व जहर दिया उलमा ॥
आजिज अब क्या तू आह व नालःकरे । डाल खौफ़ व खतर दिया उलमा ॥

पार जावेंगे आलिम आमिल । राह दिखावेंगे आलिम आमिल ॥
सुखरु सोई हैं दरदो जहां । दुख न पावेंगे आलिम आमिल ॥
आफ़्ररीं सद है उनको और शावास । रह लगावेंगे आलिम आमिल ॥
आप किसती चढ़े चढ़ावें और । फिर न आवेंगे आलिम आमिल ॥
आलिम आमिलकी खूबी यह आजिज । मत सिखावेंगे आलिम आमिल ॥

लिया मायाने खा चतुर व चिकनिया । गये दोजख समा चतुर व चिकनिया ॥
मिली उनको सतगुरु दस्तगीरी । रहे तारीक्या चतुर व चिकनिया ॥
न उनपर साधु गुरुकी मिहरबानी । अँधेर दिल छुटा चतुर चिकनिया ॥
वह घर आजिज फिरातन सादः लौहों । वहां कोई न जा चतुर चिकनिया ॥
भजन भगवान कर मीत प्यारे । लगा शैतान है ऐ मीत प्यारे ॥
है दिनमें काम सब जौर व सोच । कहाँ रहमान है ऐ मीत प्यारे ॥
तो जल्दी सोच जप हरी नामसे लग । यह तन इनसान है ऐ मीत प्यारे ॥