कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 124, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंकरके जीवन व्यतीत करने लगा और मुष्टका भोजन छोड दिया, तब ज्ञान तथा इल्मके लिये उद्योग करने लगा और ज्ञानी होगया । देखो मुसलमानोंकी हदीसोंमें लिखा है कि, जब आदम बिहिश्तसे निकाला गया तब, उस पर खुदाके यहांसे पेंगम्बरी उतरी और वह पेंगम्बर हुआ । उसी समयसे आजपर्यन्त मनुष्यके, निमित्त धर्मकी कमाई तपके तुल्य और मुक्तिकाद्वार माना गया है । सो खुदा उचित जानकर आदमको वैकुण्ठके बाहर निकाल दिया और वैकुण्ठमें चमकती तलवारोंके साथ फिरिस्तोंका पहरा बैठा दिया और उनसे कहा कि, देखो आदम अब भला बुरा पहचानने लगा क्योंकि, अब वह भी हममेंसे एक हुआ । यहांपर बहुवचनका शब्द खुदाने प्रयोग किया है कि, आदमने खुदा अर्थात् विष्णुके समान अनगिनत ब्रह्मा और अनगिनत विष्णु तथा शिव हैं—और सहस्रों ऋषि मुनि विष्णुके समान पदाधिकारी हैं और उनमें भी सृष्टिके उत्पन्न करनेकी शक्ति है ।
आदम वैकुण्ठके बाहर निकाला जाकर सांसारिक कार्योंमें संलग्न हुआ । कुरबानी और खुदाकी बन्दगी आदमके समयसे ही प्रचलित है ।
छप्पनवाँ प्रकरण
आदम और हव्वाकी संतान ।
आदमके दो पुत्र उत्पन्न हुए, एकका नाम काबील दूसरेका नाम हाबील था । दोनों भाइयोंने कुरबानीकी और परमेश्वरने हाबीलकी कुरबानीको कबूल किया तथा काबीलका अस्वीकार कर दिया तब बडे भाई काबीलको क्रोध आया उस समय परमेश्वरने अपना दर्शन देकर काबीलको समझाया और कहा कि, हे काबील ! तू क्रोध मतकर यदि तू साफ दिलसे कुरबानी करता तो स्वीकार होता तथापि तू अपने छोटे भाई हाबील पर विजयी होगा । खुदाकी आज्ञानुसार काबील अपने भाईपर विजयी हुआ और उसकी हत्या कर डाली । काबील दुष्ट तथा दुरात्मा था और हाबील विशुद्धात्मा था । इस प्रकार पृथ्वी नर रक्तसे लाल हुई । काबील की संतान पृथ्वीपर अधिकतासे फैल गयी । उन्होंने जो सुंदर स्त्रियों देखी उनके साथ विवाह कर लिया जिनसे उनकी वंश वृद्धि हुई और उनसे पृथ्वी पर पापकी अधिकता हुई—तब उनके पापोंसे खुदाको घृणा होगयी ।
आदम तो एकसौतीन वर्षका होकर मर गया था किन्तु, उसकी संतान बडीही पापी हुई, तब परमेश्वरने चाहा कि, मैं अब इन पापियोंको डुबाकर मार डालूँ ।