भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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परमात्मा सर्व शक्तिमान् है, जिसको चाहे क्षणमें विद्वान् करदे, जिसको चाहे क्षण में मूर्ख । मूसा और खरकईल आदिको क्षणभरमेही ज्ञान प्रदान किया साबल आदिका ज्ञान क्षणमें हरण कर लिया । राजाको रंक और रंकको राजा करना उसका कौतुक मात्र है । उसकी ऐसी प्रबल माया है कि, उसे जाननेको कोई समर्थ नहीं । कोई कौसा भी जानी और विद्वान् क्यों न हो उसके कार्यायमें स्वास भी नहीं हो सकता ।

एक रूप ।

९० प्रश्न—साधु और साहेब मिलकर किस प्रकार एकरूप हो जाते हैं ?

उत्तर—जो साधू लोग परमात्माके सच्चे प्रेमी हैं, वे लोक परलोक सबको तुच्छ समझते हैं । जानमाल आदि सब संसारको अनित्य समझकर उसकी ओर कभी दृष्टि नहीं देते केवल प्यारेके स्मरणमें लगे रहते हैं । ऐसे ईश्वर प्रेमियोंको वासना किञ्चित मात्रभी शेष नहीं रह जाती । अपने देहकी भी सुधि भूलकर प्यारेके चिन्तनमें विदेह हो ध्यान करते २ उसीके रूपमें मिल जाते हैं अथवा वही हो जाते हैं । उनमें मैं तूका लेशमात्र भी बखेड़ा नहीं रहता ।

दृष्टांत—लुधियाने नगरमें एक महात्मा साधु जो कि, सिद्ध भी सुने जाते थे एक अति सुन्दर यौवन और रूप पूर्ण गोकली नामकी स्त्री पर मोहित हो गये । क्रमशः वह इतने आशिक हुए कि, मान मर्यादा त्यागकर गोकलीके पीछे पीछे फिरने लगे । लोगोंने उनकी बहुत निन्दा की उनको बहुत धिक्कारा पर उसको किसी बातकी परवाह न हुई ।

एक दिन गोकली कई एक स्त्रियोंके साथ नदीमें स्नान करने गई, साधु भी उसके पीछे पीछे पहुँचा गोकलीने जैसे जलमें डुबकी मारी उसी प्रकार साधूने भी डुबकी मारी । गोता लगाकर बाहर निकलने पर संत भी गोकली हो गया । यह कौतुक देखकर लोगोंको बड़ा आश्चर्य हुआ ।

वर्तमानकालमें कितने लोग इंगरेजी शिक्षा प्राप्त करते हैं । उच्च २ परीक्षा देकर कोई बी. ए. कोई एम्. ए. कोई एल्. एल्. बी. कोई २ डी. डी. कोई डी. एल्.एल्. आदि नाना प्रकारकी उपाधि प्राप्त कर उच्च पदको प्राप्त करते हैं । उसी प्रकार सत ईश्वरी परीक्षा पासकरके ईश्वर बन जात हैं । इस प्रकार साहब साधु दोनों एक हो जाते हैं ।

साखी—तू तू करते तू हुआ, मुझमें रही न हूँ ।

आपा परका मिट गया, जित देखूं तित तूं ॥

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