कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1317, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंरावण—इसी प्रकार रावणकोभी दुष्टात्माने बहकाया । सब ऋषि, मुनि, संत साधुने बहुत समझाया । अंतमें कबीर साहबने भी उसकी भलाई उसको दर्शाई पर मूर्खने न माना बरन सत्तरवार सतगुरुपर तलवारका घात किया । उसका जो परिणाम हुआ सो कौन नहीं जानता ? इसी प्रकार कंस आदि अनेक राजाओंको दुष्ट आत्माने बहकाकर उभयलोकसे भ्रष्ट कराया ।
शिद्वाद बादशाह—पश्चिमीय बादशाहोंमेंसे शिद्वादको दुष्ट आत्माने बहकाया उस समयके नबीको जिनका नाम हूद पैगम्बर था खुदाने उस (शिद्वादको) समझानेका हुकुम दिया । हूदने बहुत समझाया पर शिद्वादने एक भी नहीं मानी । तब हूद नबीने उसको विहिंशतका वर्णन करके कहा कि, मेरा खुदा तुझको विहिंशत देगा । शिद्वादने कहा कि, मैं तेरे खुदाके समान स्वयम् विहिंशत बनवाता हूँ ।
पश्चात् बारह वर्षमें विहिंशत बनकर तैयार हुई शिद्वाद अपने साथियों और दरबारियोंको साथ लेकर विहिंशत देखने चला । पृथ्वीसे ऊपर तक जब सब सौदियोंको चढ़कर अन्तिम सौदीपर पहुँचे तो शिद्वादने एक दरिद्र मनुष्यको फटे कपड़े पहने हुये विहिंशतके द्वारपर खड़ा देखा । शिद्वादने उससे पूछा तू कौन है ? यहाँ क्यों खड़ा है ? उसने उत्तर दिया काल हूँ तेरा प्राण निकालने आया हूँ । शिद्वादने बहुत विनती की कि, मुझे विहिंशत देख लेने दे । कालने एक भी न मान एक ऐसा भयानक शब्द किया कि, शिद्वाद अपने साथियोंसहित पातालमें धँस गया ।
नमरूद—नमरूद भी दुष्टात्माका बहकाया हुआ अपनेको खुदा क हता था । उसकी रंयत और परिजन लोग उसे ईश्वरके समान दंडवत् करते थे । उस समयके नबी इब्राहीमको, खुदाकी आज्ञा हुई कि, नमरूदको समझाओ पर उसने, इब्राहीमके बहुतसे आश्चर्य देखनेपर भी न समझा बरन कहा कि हम तेरे खुदाको मारेंगे ।
फिर एक उड़न खटोला बनवाकर नमरूद आकाशको उड़ा ; जब कुछ दूर गया तब आकाश पर एक बाण चलाया । खुदाने जिबराईलको हुकुम दिया कि, इसका तीर अमुक मछलीकी पीठमें लगा दो । फिर तो रक्त भरा हुआ तीर नमरूदके पास पहुँचा उसने निश्चय करलिया कि, मैंने इब्राहीमके खुदाको मारलिया खटोला पृथ्वीपर लाया । इब्राहीम को बुलाकर कहा कि, देख, तेरे खुदाको मैं मार आया हूँ, अब बतला तेरे खुदाकी फौज कहाँ है उसको भी मारूँ?