कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1322, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंगरीबदासजी व ऋषि मुनि सदासे करते आते हैं। वही जिन्दा बाबा सब संसारका गुरु आचार्य है।
मुखम्मस तरजीया बन्द ।
तुही था इन्ददा आइन्दा बाबा । तेरा सत नाम जम अरजिन्दा बाबा ॥
तुही हर हाल है खुरसन्द बाबा । गुनह गारों का तू बखिश्न्दः बाबा ॥
तुही बन्दा खुदामें जिन्दा बाबा ।
जो पैदायश के पहिले नाम ज्ञानी । निरंजन पर तू किया हुक्मरानी ॥
तू खुद खुदरम रिहाई चार खानी । तुही है नावमें अरविन्दः बाबा ॥ तु० ॥
जो सतयुग सत सुकृत साहबको टेरा । है त्रेता में मुनिन्दर नाम हेरा ॥
कहा पहचान सबमें जलवः मेरा । हमा मौजूद हूं पायन्दः बाबा ॥ तु० ॥
सों द्वापर जुगमें करुणामय गुरु है । नबी पीरो फकीरों खबरू है ॥
जहां देखो वहां ही तूही तू है । जो ढूढेंगे तुझे याविन्दः बाबा ॥ तु० ॥
जो कलयुग पापने आदम डुवाया । तुही कब्बीर साहब तब कहाया ॥
तुही सत नाम इन्सांसं जपाया । तुझे पहिचान सो फर्खुदः बाबा ॥ तु० ॥
जो चारों युगमें और तीनों जमानः । बता इन्सानको नामे निशानः ॥
बनी आदम पड़े जम कैंद खाना । तुही काट कानकर जमफन्द बाबा ॥ तु० ॥
जो ब्रह्मा विष्णु शिव यह तीनों भाई । तेरी तालीम इनमें नहीं समाई ॥
न रमताराम सो पहिचान पाये । सो पावें प्रेमसे जोइन्दः बाबा ॥ तु० ॥
सिखाया योग तू रघुनाथजीको । मिले जिस ढंग से सो अपने पीको ॥
तुझे देखे जो छोड़े खुदखुदीको । तुही सत्त पुरुष जम गरिन्दः बाबा ॥ तु० ॥
बता रह कृष्ण और दत्ते दिगम्बर । सिखाया तूने सब पीरो पगम्बर ॥
मुहम्मदको दिखाया अपना घर । तुझे देखे शिवा शर्मिन्दः बाबा ॥ तु० ॥
तुही मुशिद हकीकी सबका सब जा । न तू नुतफा रेहमसे होवे पैदा ॥
जमानेके आशिकों सब तुझपैशेद । तू दूत और भूतका तरसिन्दः बाबा ॥ तु० ॥
जो था आदम फरिश्तोंमें गिरामी । वह आया देखकर बे इन्तजामी ॥
बना गुरु अपना रामानन्द स्वामी । बहर शै नूर तुझ ताविन्दः बाबा ॥ तु० ॥
दिथा वैराग मारगको बुजुर्गी । दिखाया काल पुरुषकी सतर्गी ॥
जो खावे जीवको अजराह सर्गी । तुही जम दूत सरबरिन्दः बाबा । तु० ॥
तुही सारे जमानेमें और जिमीमें । तुही सबकार दुनिया और दीमें ॥
तुही तातार तुकोँ अर्ब चीमें । फरंगिस्तां हवशो हिन्दूबाबा ॥ तु० ॥
जिसे तूने बताया अपनी तदबीर । सो बेपरवाह गया दरियाके तीर ॥