भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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अद्यावचन ब्रह्मप्रति ।

कहे जननि सुनहु ब्रह्मा कोउ नहि जनक तुम्हार हो ॥

हमहि ते भई सबे उत्पति हमहि सब कीन सम्हार हो ॥ २१ ॥

ब्रह्मावचन अद्या प्रति ।

सोरठा-ब्रह्मा कहते पुकार, सुनु जननी तैं चित्त दे ॥

कहत वेद निरुवार, पुरुष एक सो गुप्त है ॥ २२ ॥

अद्यावचन ब्रह्मा प्रति ।

कहे अद्या सुन ब्रह्मकुमारा । मोसे नहीं स्रष्टा न्यारा ॥

स्वर्ग मृत्यु पाताल बनाई । सात समुन्दर हम निरमाई ॥

ब्रह्मावचन अद्या प्रति ।

माना वचन तुमहि सब कीन्हा । प्रथम गुप्त तुम कस रख लीन्हा ॥

जबै वेद मुहि कहे बुझाई । अलख निरञ्जन पुरुष बनाई ॥

अब तुम आप बनो करतारा । प्रथम काहे न किया विचारा ॥

जो तुम वेद आप कथि राखा । तो कस तुम अलख निरंजन भाखा ॥

आपे आप आप निरमाई । काहे न कथन कीन तुम भाई ॥

अब मोसन छल जनि करहू । सौंचे सौंच सब कहि उच्चरहू ॥

कबीरवचन धर्मदास प्रति ।

जब ब्रह्मा यहि विधि हठ ठाना । तब अद्या मन कीन्ह तिवाना ॥

केहि विधि यहि कहूँ समझाई । विधि नहि मानत मोर बडाई ॥

जो यहि कहौं निरंजन बाता । कंहि विधि समझे यह विख्याता ॥

प्रथम कह्यो निरंजन राई । मोर दरश काहू नहि पाई ॥

अबै जो यही अलख लखावो । कौनी विधि ताको दिखलाओं ॥

अद्यावचन ब्रह्मा प्रति ।

अस विचारि पुनि ब्रह्मो समझावा । अलख निरंजन नहि दरस दिखावा ॥

ब्रह्मावचन अद्या प्रति ।

ब्रह्मा कहे मोहि ठोर बताओ । आगा पीछा जनि तुम लाओ ॥

मैं नहि मानो तुम्हरी बाता । ऐसी बात न मोहि सुहाता ॥

प्रथम तुम मुहि दीन भुलावा । अब तुम कहो न दरस दिखावा ॥

तासु दरस न पैहो पूता । ऐसी बात कहो अजगूता ॥

छंद-दरस दिखाय तत्काल दीजे मोहि न भरोस तुम्हार हो ॥

संशय निवार यहिकाल दीजे कीजे न विलम्ब लगार हो ॥

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