कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 263, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंबारहवाँ प्रकरण ।
खुदा साकार है ।
हसन उन्स और अकरमाके कथनसे प्रगट है कि, मुसलमानोंके कुरानानुसार यह विश्वास है कि, शारीरिक दृष्टिसेभी परमेश्वर देखा जाता है। सुतरां तफसीर, अजीजीमें शाह अबदुल अजीज साहबने प्रमाणित किया है कि, क्रयामतके दिन खुदा आकाशसे उतरेगा और सिंहासन पर बैठकर न्याय करेगा । उसका तेज तथा प्रताप सांसारिक सन्नाटोंके सदृश होगा । फिर कुरानसे प्रगट है कि, जो इबराहीम और मूसाका खुदा था वही खुदा मुहम्मद साहबका भी है । आदम, नूह मूसा और इब्राहीम इत्यादिने अपनी चर्मचक्षुसे खुदाको देखा । फिर मुहम्मदको खुदा दृष्टिसे कैसे देखा न जावेगा ? निस्सन्देह वह भी चर्मचक्षुसे देखा जाता है, और जो अन्तर दृष्टिसे देखा जाता है, उसका गुण कुछ कहा सुना नहीं जाता ।
तेरहवाँ प्रकरण ।
मुहम्मद साहबका जलाली खुदा ।
यह तजकीरेजलाली जो कुरान हदीस तथा तफसीरोंमें लिखा गया है, उस जलाली पुरुषसे कबीर साहबका तात्पर्य है । यदि मुहम्मदी दीनके विद्वान् इस बातकी भलीप्रकार जांच करेंगे तो, उनको पता लग जावेगा । कबीर साहबके अतिरिक्त और किसी देवता और मनुष्यमें यह सामर्थ्य नहीं है कि, मुहम्मद साहबको एक क्षणमें समस्त आकाशोंका परिभ्रमण करावे और खुदाका दर्शन कराकर पुनः मक्कामें लौटा लूवे । वे लोग बाँग देते हैं और अल्लाह अकबरका नाम लेते हैं, सो अल्लाह अकबर जिसको कहते हैं उसीका नाम कबीर है । अकबर तथा कबीरमें तनिक भी विभिन्नता नहीं है, जो अकबर है वही कबीर है और जो कबीर है वही अकबर है । वे लोग अल्लाह अकबरका नाम लेते हैं परन्तु (छोटे) अल्लाहकी पूजामें तन मन समर्पण करते हैं तथापि उनकी बाँग अकबर अल्लाहमें बड़ा प्रभाव है । यद्यपि छोटे अल्लाहको वे पूजते हैं तथापि बड़े अल्लाहकी उनको सहायता मिलती है सो इसी अकबरने मुहम्मद साहबको सत्यपुरुषका दर्शन कराया, देखो ग्रन्थ मुहम्मद'बोधका संक्षेप ।
चौदहवाँ प्रकरण ।
(इस ग्रन्थमें कबीर साहबका मुहम्मद साहबको बोध देने,
सत्यपुरुषका दर्शन कराने और मेआराजका विवरण
प्रश्नोत्तर द्वारा विस्तारपूर्वक वर्णित है)