कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 275, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूम महसूदको ॥ निश्चय परिचे निमाज गुजारै । श्रवण नेत्रको वैर
निहारौ ॥ मुहम्मद मुहम्मद क्या करे । कुरान कलमा क्या पढै ॥ किधर
किधरकी राह बतावे । विनु गुरु पीर राह ना पावे ॥
साखी—हाजी गाजी गुरु चेला, खोजो दस दरकाजा ।
अलख पुरुष कहूँ माथ नवाओ, इस विधि सरै निमाज ॥
सभै साचे काजी, साँचे साँचे मुलना वेद कुरान ॥
कहै कबीर आबसो सब आलम उपजाना ॥
हिन्दू कहिये कि, कहियै मुसलमाना । राम रहीम बसे एक थाना ॥
मनको जाने सोई मुल्ला जान । दरको जाने सोई दरवेश बखान ॥
हमतो बाबा नेकी बदी सो न्यार । दुनिया मति कोइ लावे दोष हमार ॥
हम तो कहि हैं अकेलेदस्त । ताका साहेब मक्का वस्त ॥
मक्कवन्तका साहेब अकिल मन्द । अकिल मन्द अकिल सो जाना ॥
मनमुरीद दोस्ती दाना ॥ सहर गदाई कौन पार । सिर खुरदती कौन
यार ॥ बन्दी खाने कौन यार । तख्त बादशायी कौन यार ॥ काया
यार सिर खुर्दनी । दिल यार माहीं मर्दनी ॥ जीव यार बन्दी खाने ॥
मन यार निशस्त बादशाही ॥ मन लाल दिल लाल लाल पोतदार ।
रहममाही हम साहसाह पोतदार ॥
इति कबीर साहबका वचन उचार विचार ।
अथ खान मुहम्मद अली बादशाहका प्रबोध ।
कलिक कीमोक लिप्त रसमेकी चशमें । खदयर संयम करदम ।
ओजूद राह चकित करदम ।
औबल—अक्ले पीर है मन मुरीद है । तन शहीद है असल कदाई है ॥
तकबुर दुश्मन है । गुस्सा हराम है । नफस शौतान है । चोरी लानती है । जुवारी
पलीदी है । अदब आदिल है । बे अदब कम असल है । राह पीर है । बैराह
बेपीर है । सांच बिहिश्त है । झूठ दोजख हैं । मोमदिल पाक है । संग दिल
नापाक है । हिर्स है । हैवान है । बेहिर्स वली है ।
लाइलाह हरकत है । अचेतबेगुलाम है । असलजाबेको सलाम है ।
कृतहीन जर्दरू है । दाना जौहरी है । असलकी दोस्ती है दाना शायर है । बूझे
महबूब है । बन्दगी कबूल हैं । अल्लाह नूर है । आलम हद्द है । साहिब बेहद्द
है । यकीन मुसलमान है । शील रोजा है । शर्म सुन्नत है । ईमान मुसलमान