कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 284, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंमत करो । यह बात सुनकर सब लोग अत्यंत चकित हुए कि, यह बालक तो स्वयम् ही अपना नाम बतलाता है, यह कैसा बालक है यह किसी सिद्धका अवतार है अथवा स्वयम् परमात्मा है या कोई देवता है । काशीमें इस बातकी चर्चा घर-घर होने लगी कि, नीरुके घरमें एक बच्चा आया है सो बातें करता है ।
साखी—“कासी उमगी गूल भया, मोमिनका घर घेर ।
कोई कहे ब्रह्मा विष्णु है, कोइ कहे इन्द्र कुबेर ॥
को कह वरुण धर्मराय है, कोइ कोइ कह ईस ।
सोलह कला सुमान गति, कोइ कहे जगदीस ॥
कोइ कहे बल ईश्वर नहीं, कोइ किन्नर कहलाय ।
कोइ कहे गन ईसका, ज्यों ज्यों मातु रिसाय ॥
कासीमें अचरज भया, गयी जगतकी निन्द ।
ऐसे दुल्लह ऊतरे, ज्यों कन्या अर्बिन्द ॥
खलक झलक देखन गया, राजा परजा रीत ।
जम्बु दीप जहानमें, उतरे शब्दातीत ॥
दुनी कहै यह देव है, देव कहे यह ईस ।
ईस कहै परब्रह्म है, पूरन विस्वा वीस ॥
(गोसाई गरीबदासजीके पारख अंगकी साखी)
अङ्गीसवों प्रकरण ।
काजीका नाम धरने आना और कबीर नामका निश्चय होना ।
फिर नीरुने काजीको बुलाया और पूछा कि, इस बालकका क्या नाम रखना चाहिये ? तब काजी कुरान और अन्यान्य किताबें खोलकर बालकका नाम देखने लगा, तब कुरानके अनुसार उस बालकके चार नाम निकले— १ कबीर, २—अकबर, ३ किबरा ४ किबरिया । जब ये चार नाम निकले तब काजी चुप हो अपने दांतोंके नीचे उंगली दबाने लगा । बार बार वह कुरान खोलकर देखता तो समस्त कुरान उसको उन्हीं नामोंसे भरा दिखलाई देता था । काजीके मनमें अत्यंत संदेह उत्पन्न हुआ कि, ये चारो नाम तो खुदाके हैं । काजी गंभीर चिन्तामें बुड़कियाँ लगाने लगा कि, क्या करें ! हमारे धर्मकी प्रतिष्ठा गई, इस बातपर गरीबदासजीकी साखी सुनो :—
“काजी गये कुरानले, धर लडकेका नावैं ।
अच्छर अच्छरमें फुरा, पन कबीर पहि जावैं ॥