भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

पृष्ठ 35, कुल 1367 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 35
<table border="1"> <thead> <tr> <th>विषय.</th> <th>पृष्ठ.</th> <th>विषय.</th> <th>पृष्ठ.</th> </tr> </thead> <tbody> <tr> <td>वंकुण्डकावृत्तान्त</td> <td>९२</td> <td>वैष्णव धर्मकी श्रेष्ठता</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>बहापुरी कौलास और अमरावती अदन</td> <td></td> <td>शांकरी संप्रदायका वृत्तान्त</td> <td>११३</td> </tr> <tr> <td>आदिका वृत्तान्त</td> <td>९३</td> <td>शांकरी संप्रदायसे मिलते और पन्थ</td> <td>११४</td> </tr> <tr> <td>अदन क्या है</td> <td>"</td> <td>भवसागर</td> <td>११५</td> </tr> <tr> <td>निरंजनने सत्य लोककी नकलपर अपने</td> <td></td> <td>बन्धन</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>लोक बनाये</td> <td>९४</td> <td>प्रथम भागके प्रथम अध्यायका उपसंहार</td> <td>११६</td> </tr> <tr> <td>तीनों पुत्रोंकी कृतघ्नता</td> <td>"</td> <td>गजल आजिज</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>आद्याकी पूजाका प्रचार</td> <td>९५</td> <td>प्रथम अध्यायका परिशिष्ट</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>पांचोंकी पूजाका निश्चित होना और</td> <td></td> <td>अनुराग सागरसे सृष्टिकी उत्पत्तिके</td> <td></td> </tr> <tr> <td>निरंजनका सर्वाधिपत्य</td> <td>"</td> <td>प्रकरणका प्रमाण</td> <td>१२२</td> </tr> <tr> <td>तपशिलाका वृत्तान्त</td> <td>९६</td> <td>सृष्टिके आदिमें क्या था</td> <td>१२३</td> </tr> <tr> <td>भवसागरका स्वरूप</td> <td>९७</td> <td>सृष्टिकी उत्पत्ति सत्यपुरुषकी रचना</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>दुःखितजीवोंकी पुकार व सत्यपुरुषकी गौहार</td> <td>९८</td> <td>सोलह सुतका प्रगट होना</td> <td>१२४</td> </tr> <tr> <td>ज्ञानी अर्थात् कबीर साहिबका सत्य-</td> <td></td> <td>निरंजनकी तपस्या और मान सरोवर</td> <td></td> </tr> <tr> <td>लोकसे तपशिलाके समीप जाना और</td> <td></td> <td>तथा सुन्नकी प्राप्ति</td> <td>१२५</td> </tr> <tr> <td>समस्त जीवोंके ठण्डा करनेका वृत्तान्त</td> <td>"</td> <td>निरंजनको सृष्टि रचनाका साज मिलना</td> <td>१२६</td> </tr> <tr> <td>जीवोंका भक्ति करनेकी प्रतिज्ञा करना</td> <td>१००</td> <td>सहजका धर्मरायके पास जाकर पुरुषकी</td> <td></td> </tr> <tr> <td>पूर्व देशमें काल पुरुषका जीवोंको फसानेके—</td> <td></td> <td>आज्ञा सुनाना</td> <td>१२७</td> </tr> <tr> <td>—लिये नानामत मतान्तरका प्रचार करना</td> <td>१०१</td> <td>निरंजनका कूर्मके पास साज लेनेको जाना</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>पश्चिमके चार किताबोंका वर्णन</td> <td></td> <td>वहुरि पुरुषका सहजको निरंजनके निकट</td> <td></td> </tr> <tr> <td>तौरीतमें उत्पत्तिका वृत्तान्त आदमकी पैदाइश</td> <td>१०२</td> <td>भेजना</td> <td>१२८</td> </tr> <tr> <td>आदम और हव्वाकी सन्तान</td> <td>१०३</td> <td>सहजका निरंजनके निकट पहुँचना</td> <td>१२९</td> </tr> <tr> <td>जलप्रलय और नूहकी किस्तीका वर्णन</td> <td>१०४</td> <td>आद्याकी उत्पत्ति</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>इब्राहीम पैगंबरका वर्णन</td> <td>"</td> <td>सत्यपुरुषका आद्याको मूल बीज देना</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>यूसुफ पैगंबरका वृत्तान्त</td> <td>१०५</td> <td>पुनि पुरुषका निरंजनके ढिग जाना</td> <td>१३०</td> </tr> <tr> <td>फिरऊनका वृत्तान्त</td> <td>"</td> <td>निरंजनका मानसरोवरमें आद्याको पाकर</td> <td></td> </tr> <tr> <td>मूसाकी उत्पत्तिका वृत्तान्त</td> <td>१०६</td> <td>मोहवश हो उसे निगलजाना और</td> <td></td> </tr> <tr> <td>दूसरी किताब जबूरका वृत्तान्त</td> <td>१०७</td> <td>सत्यपुरुषका शाप पाना</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>तीसरी किताब इजीलका वृत्तान्त</td> <td>१०८</td> <td>पुरुषका शाप निरंजन प्रति</td> <td>१३१</td> </tr> <tr> <td>चौथी किताब कुरानका वृत्तान्त</td> <td>"</td> <td>सत्यपुरुषका योगजीतजीको निरंजनके</td> <td></td> </tr> <tr> <td>आठ वेदोंका वर्णन, निरञ्जनका पंथ</td> <td>१०९</td> <td>पास उसे मान सरोबरसे निकाल</td> <td></td> </tr> <tr> <td>आदि भवानी आद्याका पन्थ</td> <td>"</td> <td>देनेकी आज्ञा देकर भेजना</td> <td>"</td> </tr> <tr> <td>ब्रह्माका पंथ, विष्णु और शिवकापंथ</td> <td>१११</td> <td>भवसागरकी रचना</td> <td>१३३</td> </tr> <tr> <td>विष्णुका पंथ</td> <td>"</td> <td>सिन्धु मंथन और चौदह रत्न उत्पत्ति</td> <td>१३४</td> </tr> <tr> <td>प्रथम श्री सम्प्रदायके धाम क्षेत्रका वृत्तान्त</td> <td>"</td> <td>द्वितीय तृतीय बार सिन्धुमंथन</td> <td>१३५</td> </tr> <tr> <td>ब्रह्म संप्रदायके धामक्षेत्रका वृत्तान्त</td> <td>११२</td> <td>आद्याका तीनों पुत्रोंको सृष्टि रचनेकी</td> <td></td> </tr> <tr> <td>चौथे सनकादिक संप्रदायका वृत्तान्त</td> <td>"</td> <td>आज्ञा और पांच खानकी उत्पत्ति</td> <td>१३६</td> </tr> <tr> <td>चारों भाईके धाम क्षेत्रका वृत्तान्त</td> <td>"</td> <td></td> <td></td> </tr> </tbody> </table>