भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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काम क्रोधादिके झगड़ोंसे पृथक् कर देता है। सत्यगुरुके मिलनेका मार्ग बतलाकर अपने प्राकृतिकसे मिला देता है। चार वेद प्राकृतिक वेद कहलाते हैं। ये चारों विशेषता सांसारिक मनुष्योंके निमित्त ठहराए गए हैं। मुक्तिके अधिकारियोंके एतद्द्वारा सूक्ष्म वेदमात्र है। सूक्ष्म वेदकी शिक्षामें किसी प्रकारका अवगुण अथवा त्रुटि नहीं है वह निर्दोष तथा अवगुण रहित है दूसरेमें नहीं। यदि वेदों और पुस्तकों द्वारा किसीकी मुक्ति होजाती तो मुक्तिके अधिकारियोंके लिये सूक्ष्म वेद पृथक् न ठहराया जाता।

अध्याय ७.

विष्णु भगवान्।

कालपुरुष तीनों लोकोंरूपी भवसागरकी रचना किये; पीछे उसने अपनी स्त्री आद्या और अपने तीनों पुत्रोंको तीनों लोकोंके प्रबंधका अधिकार तथा दूसरे कार्योंके लिये नियुक्त कर दिया, इन तीनोंमें विष्णुको उच्चश्रेणीका अधिकारी नियत किया, सबसे श्रेष्ठता दी। माता-पिता दोनोंने विष्णुको आशीर्वाद दिया, श्रेष्ठता प्रदान का। विष्णुको अपने स्थानपर तीनों लोकोंका कर्ता-धर्ता नियत किया। निरञ्जन तथा आद्याने अपना प्रभाव तथा बल विष्णुमें भर दिया। जैसा कि, मैं प्रथम परिच्छेदमें लिख आया हूँ। विष्णुकी माता अपने पुत्रपर अत्यंत प्रसन्न हुई। इस कारण विष्णु इस भवसागरके कर्ता-धर्ता ठहरे। जैसे कि, चक्रवर्तीराजा समस्त देशोंके राजोंपर राज्य करता है, इसी प्रकार विष्णु तीनों लोकोंके चक्रवर्ती हुए। आपको सब स्थानोंकी उपस्थिति तथा प्रकट गुप्तका बल प्रदान किया गया। ये प्रत्येक हृदयका भेद जानने लगे। प्रगट मनुष्यके पाप पुण्यका प्रतिशोध करना यमके अधिकारमें हुवा। प्रत्येकका भाग्य नक्षत्र विष्णुके अधिकार में हुवा। नरक बैकुण्ठ तथा उसके चारों ओर विष्णुका अधिकार फैला। चार खान चौरासी लक्ष योनिके जीव विष्णुके अधिकारमें ठहरे। इन तीनों लोकका रचयिता और सन्नाट है जब जैसा चाहता है बँसा करता है समस्त अधिकार इत्यादि उसको मिला है। तीनों लोकोंका रचयिता तथा परमेश्वर यह कहलाता है। इसी परमेश्वरका पूजन तीनों लोकोंमें हो रहा है। ब्रह्मा और शिव ये दोनों उसके मंत्री हैं। यह बादशाह है। यह स्वशरीर परमेश्वर है समस्त पृथ्वी तथा आकाशके मनुष्य उसकी पूजा करते हैं। इसी परमेश्वरकी आज्ञा सभी स्थानोंमें प्रचलित है। जहाँ मनुष्योंपर कठिनाई उपस्थित होती है तो उसके निवारणार्थ इस परमेश्वरका