कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 369, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंबस्तुपर किसी मनुष्यकीसी मर्ति उसके ऊपर दिखलाई दी । (२६) मैंने उसकी कमरसे लेकर ऊपरकी ऊँचाई पर्यन्त पालिश किए हुए पीतलका शार्ङ और अग्निस्फुलिङ्गकासा तेज उसके मध्य तथा चारों ओर देखा । उसकी कमरसे लेकर नीचेपर्यन्त मैंने अग्निकी लपटकासा तेज देखा । चारों ओर एक-प्रकारकी जगमगाहट देखी । (२७) जैसे उस कमानका स्वरूप है जो वर्षाके दिवसों में बादलमें दिखाई देता है । वैसे ही आपसे उस जगमगाहट का दिखावा था । परमेश्वरके तेजस्वरूपका यही दिखावा था । देखतेही मैं औंधे मुंह गिरा और मैंने एक ऐसा शब्द सुना जैसे कि, किसीने कहा २-बाब (१) और उसने मुझसे कहा कि, ए मनुष्य ! अपने पैरोंपर खड़ा हो कि, मैं तुझसे कुछ कहा चाहता हूँ । (२) जब उसने इस प्रकार कहा तब आत्माने मुझमें प्रवेश दिया और मुझको पैरोंपर खड़ा किया । तब मैंने उसकी सुनी कि, मुझसे बातें करता था । (३) उसने मुझसे कहा कि, ए मनुष्य ! मैं तुझे बनी, ईसराईल उन बागी झुंडोंके पास जो मुझसे फिरगए हैं भेजता हूँ, वे और उनके बाप दादे आजके दिवस पर्यन्त मुझसे विरुद्धता करते हैं । (४) कारण यह कि, वे निलंज्ज और कठोर हृदय बालक हैं जिनके पास मैं तुमको भेजता हूँ तू उनसे कह कि, खुदाबन्द यह वाद यों आज्ञा देता है ।
जब मैंने दृष्टिपात किया तो क्या देखता हूँ कि, उसका एक हाथ मेरी ओर उठा है और उसके हाथमें अनेक पुस्तकें हैं और उन पुस्तकोंमें शोककाव्य लिखा है । तब मैंने मुंह खोला और उन समस्त पुस्तकोंको खालिया । उस समय वह मुझको मधुके सद्गुण मीठी जान पड़ीं और मैंने समस्त पुस्तकोंसे अपनी आंतडियों भरलीं । तब खुदाबन्दने मुझको आज्ञा दी कि, तू मेरी आज्ञा लेकर बनी इसराईलके पास जाकर कह दे कि, विरुद्धता छोड़कर मेरी सेवा स्वीकार करो ।
यहाँपर मेरा अभिप्राय केवल इतना था कि, मूसाके खुदाका स्वरूप लोगोंपर प्रगट होवे मालूम करें कि, जो कुछ वेदमें है वही बात तौरीत तथा दूसरे नबियोंकी पुस्तकमें है इस विषयमें तनिकभी विभिन्नता नहीं ।
अग्निको विष्णुभवरूप कहना ।
“वेदके अनुसार परमेश्वर अग्निभी है और वह अग्नि विष्णु है ।”
मैं पहले लिख आया हूँ कि, सूक्ष्म वेदका कथन है कि, सत्य पुरुषने काल-पुरुषको अपने क्रोध और प्रकोपके अंशसे बनाया था । वह कालपुरुष जब सत्य-पुरुषकी अग्निके भागसे बना प्रबल हुआ है । फिर उसने अपना समस्त तेज