भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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विष्णुमें भरकर विष्णुको अपना उत्तराधिकारी एवं समस्त संसारका रचयिता ठहराया है। इस कारण यह विष्णु अग्निकी प्रतिमूर्ति है। इसीका पूजन समस्त संसारमें, हो रहा है। वही आग खुदा है, इसी आगको हिन्दू मुसलमान ईसाई यहूदी इत्यादि षट्दर्शनके लोग पूज रहे हैं। किसी प्रकार पूजें, समस्त पृथ्वी पर इसीकी पूजा है। यज्ञ हवन इत्यादि इसीके निमित्त होता है। जो कुछ बलिप्रदान अथवा महाबलिप्रदान आदि हैं हवन इत्यादि सब उसीके निमित्त होता है। वह परमेश्वर अग्नि है और अग्नि उनका मुंह है, जो कुछ उसके नामसे आगमें पड़ता है सो सब उसका भोजन है। अन्न, फल, घी, गुड़, मनुष्य और पशु सब उसके भोजन हैं। वह सबको खाता है, समस्त मनुष्य इसी आगकी पूजा करते हैं। इसका भेद बिलकुल नहीं जानते। समस्त पवित्र पुस्तकें इसी अग्निकी प्रशंसा तथा बड़ाई प्रगट करते हैं। इस अग्निकी पहचान बिना सद्-गुरुकी आज्ञाके नहीं हो सकती। जो कुछ वेद बतलाता है और ऋषीश्वर कहते हैं, वही कथन अंबियाका देखो।

खिरोजका (३) बाब (२) डुरेबके पर्वतपर मूसापर खुदाबन्द अग्निकी लपटोंमें प्रगट हुआ। देखो तौरीतमें।

खिरोज २४-१७-खुदाबन्दका जलाल दहकती

आगके सद्गुण दिखालाई देता था।

इसनसना ४-२४-तेरा परमेश्वर एक मस्म करनेवाली आग है।

तथा ४-३३-परमेश्वरकी आवाज आगमेंसे बोलते सुनी

तथा ५-४-परमेश्वरने अग्निमेंसे बातें कीं।

तथा ९-१५-समस्त पर्वत अग्निसे जल रहा था मूसा
पर्वतसे उतरा।

२ समोइल २२-९-खुदाके मुहँसे आग निकलकर खागई।

मकाशिफ़ात २०-९-खुदाके पाससे आग उतरी और उनको खागई।

विराट् पुरुष जिसकी प्रशंसा वेद करता है वही विराट् पुरुष विष्णुका अवतार है। जब अर्जुनको दिखाया तो वह डर गया था जब मूसाको दिखाया तो मसा अचेत हो गया, न देख सका। वही विराट् पुरुष ईसा है। देखो मतीकी इञ्जील (१७) बाब (१) से (९) आपत पर्यन्त पढ़े।

और छः दिवसोंके उपरान्त मसीह, पिटर्स याकूब और भाई योहन्नाको पृथक् एक ऊँचे पर्वतपर लेगया। (२) उनको सामने उसकी सूरत बदल गई। उसका मुखडा सूर्यसा चमका, उसके, वस्त्र तेजके सद्गुण श्वेत हो गये। (३)