भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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को तुच्छसमझनेवाली ज्ञानधारा भी बहती जाती थी। इतनेहीमें बहो घृताची नामकी अप्सरा आ उपस्थित हुई पर उसे उन्होंने अपने लिये उचित न समझा अतः उसके शरीरको न छुआ तथा न मुग्धदृष्टिसे देखाही ऋषिकी स्थिर वृत्तिसे तपस्वियोंके ठगनेवाली वो लचीली अप्सरा तोती बनकर उड़ती बनी। अरणीके प्रति जो अग्नि जैसे पुत्रकी भावना हुई थी वो इतनी प्रबल हो उठी कि, उन्हें इसका भान भी न हुआ उनका तेज अरणिमें प्रविष्ट हो गया, मथते मथते व्यास जैसी आकृतिके शुक्रदेव उसीसे प्रकट हो गये। भगवान् व्यास देवके इन्हें गृहस्थके उपदेश देनेपर इन्होंने पितासे कह दिया कि, मैं गृहस्थ न होऊँगा न कर्मकाण्ड ही पढ़ूँगा। मुझे योग, भक्तियोग, ज्ञानयोग, तथा और भी प्रारब्धके भंजक शास्त्रोंको पढ़ाइये, दूसरे विषयोंको मैं कदापि न पढ़ूँगा। पुत्रके ऐसे भावोंको देखकर व्यासदेवजीने उन्हें बेही शास्त्र पढ़ाये तथा परमहंसोंकी संहिता श्रीमद्भागवत भी पढ़ा दी। अन्तमें जीवन्मुक्तिका उपदेश लेनेके लिये जनकजीके पास भेजा कि, बहो इनकी रही सही कमी पूरी हो जाय। ये गृहस्थचव्यसि नितान्त उदासीन थे। राजा जनकके समझानेपर जीवन्मुक्तोंकी तरह गृहस्थों में रहे। पीछे सबका त्याग करके संन्यासी हो गये। पीछे महाराज परिक्षित् को उपदेश देनेके लिये हस्तिनापुर पधारे थे। बहोसे आपने परीक्षित्को मुक्त करनेके लिये भागवत सुनाई थी। आपके तेजके सामने सबका तेज फीका पड़ जाया करता था। कबीर साहिबने इन्हें अधर कटोरीक दीवानोंमें याद किया है कि, ये अब भी पराभक्तिरूपी प्रेम मदिराको पीकर दीवाने बने फिर रहे हैं।

भगवान् व्यास।

संसारमें ऐसा कोई व्यक्ति न होगा जो भगवान् व्यासदेवको न जानता हो। चाहे कोई हिन्दू हो वा अहिन्दू सबको इसीका अध्यात्मप्रकाश मिल रहा है। इसीके बनाये ब्रह्मसूत्रके भाष्योंका निर्माण करके आज आचार्य कहलाये जा रहे हैं। शुक्र जैसे पुत्र पानेका सौभाग्य आपको ही मिला था।

उनके अवतार।

सूतजी कहते हैं कि, सातवें मन्वन्तरमें और अट्ठाईसवें युगमें जो मनु उत्पन्न हुवा वह व्यास था और उन्नीसवें युगमें द्रोणी नामक व्यास उत्पन्न होगा और सातवें युगमें अनन्त नामक व्यास होंगे। यह बात सुनकर शौनकजीने सूतजीसे पूछा कि, ए महाराज! व्यासजीके अवतारोंका विवरण सविस्तार रूपसे कहो कि, किस २ युगमें कौन २ अवतार हुए? तब सूतजीने कहा कि, पहले द्वापरमें (१) स्वयम् वेद नामक व्यास जिसको स्वयम्भू कहते हैं