कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 405, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंव्यक्तियोंमें विशेष भाव रखते हैं। तथा इनमेंसे बहुतोंका प्रकरण उनकी वाणीमें आ भी गया है यह भी एक कारण इस प्रसंगके यहाँ रखनेका है।
हजरत आदम तथा नूह महात्मा ।
हजरत आदम तथा नूह दोनों श्रेष्ठ महात्मा हुए। आपकी बातें परमेश्वरके साथ हुवा करती थीं। विष्णु प्रत्यक्षमें आपको दर्शन दिया करते तथा आपसे वार्तालाप किया करते थे। कबीर साहबने कहा कि, आदम ब्रह्माका अवतार है। आदमके बाद हजरत नूह आदमके समान हुए। जिससे समस्त सृष्टिकी उत्पत्ति तथा स्थिति है। सांसारिक वासनाओंमें फँसे हुए तथा पूरे और पक्के दुनियाँदार थे।
हजरत इबराहीम और इसहाक आदि।
हजरत नूहके उपरान्त इबराहीम बड़ा धार्मिक हुवा, एक परमेश्वरके माननेमें बड़ा सच्चा था। परमेश्वरपर भरोसा रक्खा करता था। ये पश्चिमीय देशोंके भविष्यवक्ता गण प्रायः गृहस्थ थे। स्वच्छ हृदय तथा भले थे अपने आन्तरिक प्रकाशसे बहुतसी बातोंको जान लेते थे। हजरत इबराहीमके साथ परमेश्वर बातें किया करता था बरन् आपके शिष्टाचारको भी ग्रहण किया करता था। इबराहीमका पुत्र इसहाक भी ऐसाही अपने पिता इबराहीमके सदृश भला आदमी एवं ईश्वरपूजक था, दोनोंके गुण तौरीतमें देखो।
इसहाकका पुत्र याकूब अपने श्वशुरकी भेड़ बकरियाँ चराता था। स्त्रीके निमित्त उसने चौदह वर्षपर्यन्त अपने श्वशुरकी सेवा की।
याकूबका दूसरा नाम इसराईल हुवा। परमेश्वरने उसको आशीर्वाद दिया, उसके बारह पुत्र हुए, वही यहूदियोंके बारह सरदार कहलाते हैं। ये सब गृहस्थ और सांसारिक वासनाओंमें सने हुए हैं।
इसराईलकी परिश्रम सेवा पर परमेश्वरने दया की कि, उसके बारह पुत्र, बरन् कनआनके सम्भ्राद् हो गए।
हजरत दाऊन और सुलेमान।
हजरत दाऊन बादशाह और नबी था। परमेश्वरके प्रेममें गाता नाचता और रोता था। उसने बादशाहीमें बहुत रक्तपात और काटकुटकिया। दाऊदके गानेमें बड़ा प्रभाव था, जैसा कि मने इतः पूर्व दिखलाया है। दाऊदका पुत्र सुलेमान बादशाह हुवा। इन दोनों महाशयोंकी परमेश्वरसे आपसमें वार्तालाप हुवा करती थी। सुलेमान बादशाहको परमेश्वरने तीनों पदार्थ प्रदान किये। अर्थात् बुद्धिमानी, अनागतवक्तृता और बादशाही। इन दोनों महाशयोंका वृत्तान्त पुराने अहदनामा और मुसलमानी हदीसोंमें देखो।