कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 406, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंदाऊद बादशाहकी निन्यानवें स्त्रियाँ थीं। परन्तु उरियाह अपने भृत्यकी स्त्रीको अपने कार्यमें लानेके कारण वह विशेषतः बंधनमें पड़ा। परमेश्वर उससे रुष्ट हो गया। परन्तु उसके रोने धोनेके कारण परमेश्वर उसपर दयालु हो गया।
दाऊदका पुत्र मुलेमान जब सिंहासनारूढ़ हुवा तब उसने आनन्द सम्भोगके अनेक आयोजन किये, उसकी जो सातसौ स्त्रियाँ और तीन सौ वेश्याएँ थीं, उन सबने मिलकर मुलेमानकी बुद्धि भ्रष्ट कर दीं। मूर्तिपूजा करवाई। ये दोनों महाशय सांसारिक शारीरिक विकारोंके वशीभूत हुए इस लोकसे विदा हुए।
हजरत मूसा।
हजरत मूसा का जन्म मिश्रदेशमें हुआ। इबराहीमके घरानेमें मूसा श्रेष्ठ नबी (भविष्यवक्ता) हुवा। उसको फ़िरऊनके बंधनसे इबराहीमकी सन्तानको छुडानेके निमित्त परमेश्वरकी आज्ञा हुई। यह फ़िरऊनकी सेवामें उपस्थित हुवा परमेश्वरकी आज्ञासे अनेक कौतुक दिखलाये। इब्रानियोंको फ़िरऊन बादशाहके बंध बंधनसे छुडाकर कनआऊनके वास्तविक देशमें पहुँचा दिया। इसका पूर्णतया विवरण किताब तौरीतकी उत्पत्तिमें लिखा है।
चालीस वर्षके वयमें मूसाने एक मिसरीको इक इब्रानीके बदले मार डाला। इस भयसे कि, अब फ़िरऊन (परमात्मा बांगीशाह) मुझको मार डालेगा भयसे वह भागा। चालीस वर्षपर्यन्त महमानियामें अपने श्वशुर पतरूकी भेड़ बकरियाँ चराता रहा। अस्सी वर्षके वयमें मूसाने अपूर्व तत्त्ववक्ताकी पदवी पाई। परमेश्वरकी आज्ञासे पुनः मिश्र देशको गया। मूसाका वृत्तान्त तौरीत और गुलजार मूसा और अहादीस मुहम्मदियामें इस प्रकार लिखा है कि, जब इब्रानियोंका आधिक्य देखा गया तब फ़िरऊन नितान्तही भयभीत हुवा कि, यह सब चढ़ाई करके मेरा राज्य न छीनलें। उनको बालकोंकी हत्या वह करने लगा। जब इब्रानियोंकी रोलार्डका शब्द आकाशपर्यन्त पहुँचा तब परम दयालु परमेश्वरको दया आई। कुतुबमुहम्मदियामें लिखा है कि, एक दिवस फ़िरऊनने ऐसा स्वप्न देखा कि, शाम देशमें एक ऐसी अग्नि आई है कि, जिसने मेरे मिश्र देशको जलाकर भस्म कर दिया है। यह स्वप्न देखकर वह नितान्तही भयभीत हुवा। बुद्धिमानोंसे पूछा कि, इस स्वप्नका तात्पर्य कहो? उन लोगोंने कहा कि, इब्रानियोंमें एक ऐसा मनुष्य उत्पन्न होगा जो फ़िरऊनके राज्यको