कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 414, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंवेद तथा पुस्तकें स्पष्ट रूपसे प्रगट करती हैं कि, यह परमेश्वर आग है। जो कोई इस अग्नि परमेश्वरका पूजन करेगा सो बिना कृपाप्राप्तिके कैसे त्राण पासकता है। इस अग्नि परमेश्वर उसके अनुगामियोंने तीनों लोकमें आग लगा रखी है। जो कोई बड़ा भाग्यशाली हो बचे। षट्दर्शनका परमेश्वर और मूसाइयोंका परमेश्वर ईसाइयों और मुहम्मदियोंका परमेश्वर यही अग्नि है। सो बिना उपदेशके सत्यगुरुके उस अग्नि परमेश्वरको कोई पहचान नहीं सकता। जिस किसीने उसे न पहचाना तथा सत्यगुरुके वचनको न माना उसपर न जाने कौसी कठिनाई हुई। पहचानना उसीका उचित तथा यथेष्ट है जो कि, उसे पहचानकर उससे भाग जावे। फिर उस ओर पैर न रखे जहाँ कि, उसको जलानेवाली आग आ घरे। यह इसी मुसद्दसका भाव है।
पाँच तत्त्व और तीन गुणों द्वारा यह तीनों लोक भवसागर बसा हुआ है। जबलें पाँच तत्त्व तीनगुणसे मनुष्य पृथक् न हो तबलो कदापि छुटकारा न होगा। जब पाँच तत्त्व और तीन गुणोंसे पृथक् होना चाहेगा तब जीवनकी आशा नहीं। इसी कारण हजरत ईसाने इज्जीलमें कहा है कि, जो जीवितही मरेगा वो सदैवके निमित्त जी जावेगा।
मती १०-३८-जो कोई सलीब उठाकर मेरे पीछे नहीं आता वह मेरे योग्य नहीं।
मरक़स १०२१ सलीब उठाकर मेरे पीछे हो ले।
लुका ९-२३ अपनी सलीब प्रतिदिवस उठाकर मेरा अनुसरण करो।
रोमियों ६-६-मनुष्यता उसके साथ सलीबपर खिंचेगी।
इस पश्चिमदेशमें दो अपूर्ववक्ता प्रतिष्ठित और सर्वप्रिय हुए। प्रथम ईसा, दूसरे मूसा। ईसा तो स्वयम् निरंजनके अवतार हुए। मूसा विष्णुके साथ वैकुण्ठमें मानेगए।
योहन नबी।
योहन, जकरिया भविष्यद्वक्ताका पुत्र था। हजरत ईसाका कथन है कि, योहन्नासे श्रेष्ठ और कोई अनागतवक्ता नहीं हुआ। यह योहन्ना जभी माताके गर्भमें था, उसी समय वह आन्तरिक प्रकाशसे भर गया। यह मनुष्य रातदिन ईश्वरीयभयसे रोया करता था। यहाँलॉक, रोते रोते अशुचिह्व उसके गालोंपर पड़ गए, चमड़ेपर घाव पड़ गया। यह व्यक्ति वनमें रहा करता था टीडी मधु खाया करता था, बालोंका वस्त्र पहना करता था। इस योहनके मुसलमानी धर्मकी पुस्तकोंमें नबीयहि्या कहते हैं। उसके बाबमें बहुत कुछ लिखा है। यह