कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 432, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंएक ओर अबदुल्लाको रख और दूसरी ओर दश ऊंट रख, जिसमें दश ऊंटोंको परमेश्वर अबदुल्लाके बदले स्वीकार करे । अबदुल्लाका बलिप्रदान क्षमा कर दे । फिर दश ऊँच जब अबदुल्लाके बराबर न हुए तब बीस ऊंट रखे । फिर तीस फिर चालीस यहाँलों कि, एक सौ ऊंट तक रखे गये जब सौ ऊंट रखे तब तराजूको दोनों ओरके पलडे बराबर होगा । सौ ऊंटोंका बलिप्रदान हुवा । इस प्रकार अबदुल्ला बच गया । पुत्रके बचजानेसे अबदुलमुत्तलिवको बड़ा हर्ष हुवा इसी अबदुल्लासे मुहम्मद साहब उत्पन्न हुए ॥
इसी प्रकार सनस्त पृवीपर बलिप्रदान होता चला आता है । इसके अतिरिक्त अनेक प्रकारके बलिप्रदानोंका उल्लेख किया गया है । इसकी तरह वही प्रथा चारों पुस्तकोंमें चला आता है और चारों पुस्तकोंके प्रचलित होनेके पूर्वसे भी यही प्रथा चली आती है । जब पुस्तकें नहीं थीं तब परमेश्वर प्रगट होकर आज्ञा दिया करता था । इसके अतिरिक्त अनेक मनुष्योंको परमेश्वरके दर्शन होते, बहुतेरे मनुष्योंसे वार्तालाप हुआ करता । पश्चिम देशमें जो पहिली पुस्तक पृथ्वी पर प्रगट हुई वह तौरीत है । यह तौरीत पश्चिमीय देशवासियोंमें पहले प्रचलित हुई जो उसकी आज्ञाएँ हैं वेही उनके माननेवालेके ईश्वरकी आज्ञाएँ हैं ।
अध्याय ११.
मूसाकी पुस्तकें ।
यह तौरीत हज़रत मूसाके निमित्त उपस्थित हुई । इसमें शारीरिक बातें हैं । आदमको परमेश्वरने साग पात फल इत्यादि खानेके निमित्त बताया परन्तु नूहको परमेश्वरने धोखा दिया । पशुओंका मांस जैसे साग पात इत्यादिके भोजन की आज्ञा दी । वही प्रथा चिरकालसे चली आती है । जैसे मैंने वेदमें कुछ बातें संक्षेपतः लिखीं, उसी प्रकार तौरीतमेंसे कुछ बातें प्रगट करता हूँ ।
प्रथम तौरीत ।
मूसाकी प्रथम पुस्तकमें तो उत्पत्ति इत्यादि कही है ।
खिरोज मूसाकी दूसरी पुस्तकका नाम है । इसमें सीना पर्वत पर परमेश्वर उपस्थित हुवा । मूसाको समस्त धर्म कर्मोंकी प्रथा बतलाई । यहाँ सब तरहके बलिप्रदानोंकी आज्ञाएँ देता है । बलिप्रदान—दोष का बलिप्रदान । ईदुज्जहा (१९) बाबसे (२४) बाबपर्यन्त सब नियम देखो (२४) बाब (१९) आयत में मूसा हारूँ इत्यादि को परमेश्वर दर्शन देता है । (१७) परमेश्वरका तेज बनी इसराईलकी दृष्टिके समक्ष, देखती अग्निके समान दिखाई देता है । खिरोज