भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 444

बूझकर कुएँमें फँद पड़ते हैं क्या उन्हें भयका कुछ ध्यान नहीं रहता ? झूठे काम हाँक मार मारकर समस्त संसारको बंधनमें फँसा रहे हैं, उनको जो कोई पहचाने वो ही कालके जालसे बचे । वे लोग समस्त संसारमें आग लगा रहे हैं और समस्त जीव जल रहे हैं । कालपुरुष सबको जला जलाकर हजम करता जाता है । इसके पेटमें सब समागये ; कबीर साहिबने इसी बातको बड़े सुन्दर शब्दोंमें कहा है —

गगनमें आग लगी बड़ी भारी ॥

धरती जल गई अम्बर जल गयो, जल गयो सकल पसारा ।

चन्दा जल गया सूरज जल गया, जल गया नौलाख तारा ॥

ब्रह्मा मरे विष्णु मर गए, शंकर नेजाधारी ।

रामों मर गए, लछिमन मर गए, मर गए कृष्णमुसारी ॥

कोटिन कोट कनैया मर गए, रैयत कौन बिचारी ।

कहै कबीर सुनहु भाई साधो, अलख पुरुष अविकारी ॥

आकाशमें कालपुरुषरूपी बड़ी भारी आग लग रही है इसी आगमें अपने समयपर धरती अंबर और सारा संसार जलगया । आसमानमें खिलनेवाले चाँद और सूरज तथा चाँदकी शोभाको चौगुने करनेवाले नौलाख तारे भी उसमें समा गये । ब्रह्मा विष्णु और महेश ये भी इसके चक्करसे न बचपाये सत्य पुरुषके अवतार राम लछिमन और कृष्ण भी अपने समयपर अपनी झलक दिखाकर जैसे झलके थे, वैसेही अदृश्य होगये । अनेकों राजाएं न जाने कहाँ छिप गये ? रैयतका तो पताही क्या है । सबको काल जहाँका तहाँ कर देता है । केवल एक अलख पुरुष विकार रहित है । वही सबका सब कुछ है वो भक्तोंको कालपुरुषसे बचानेके लिये आता है पर कालके राज्यमें अधिक दिन न रहकर अपने सत्यलोकको चले गये । क्या कालपुरुषकी धूर्ततासे लोग अनभिज्ञ हैं ? क्या हजरत ईसा पुकार कर नहीं कहते कि, मैं आग लगाने आया हूँ । मैं तलवार चलाने आया, मैं शान्ति स्थापनार्थ नहीं आया । देखो, समस्त संसारमें तलवार चल रही है, चोर नहीं आता, चुराने मारनेको मैं आया हूँ, मनुष्योंके फसानेके निमित्त यह सब कालपुत्र नियुक्त हैं । अंधा मनुष्य इन बातोंको नहीं समझ सकता, उनको शाफी और नाजी समझता है ।

कालके समस्त पुत्र हाँक मार मारकर मनुष्योंको फँसा फँसाकर मारते हैं । परन्तु उनके धोखेको बिना हंसकबीरके कोई नहीं पहचान सकता । वेही लोग इस संसारमें आग लगाने एवं बध करनेको आए हैं । वे कदापि शान्तिस्थापन करने नहीं आते, बरन् तलवार चलाने आते हैं । वे भयानक भेड़िया हैं कि, भेड़चर्म