भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 448

फल उन्हें सत्यगुरु कबीरसाहबसे मिलेगा। कारण यह कि, समस्त वैष्णवोंके प्रधान अगुवा कबीर साहब हैं अन्तमें चारों सम्प्रादायोंके वैष्णव कबीर साहबसे जा मिलेंगे, तब सबके सब मुक्ति पावेंगे। सब पंथ तो इसी सत्यगुरुके हैं परन्तु वैष्णव धर्म कबीर पंथसे विशेष अंतर नहीं रखता है। दूसरे शब्दोंमें यह भी कहा जा सकता है कि, कबीरपंथ वैष्णव संप्रदायका ही एक भाग है।

कुरानमें तो स्पष्ट लिखा है कि, जो ईसा तथा मूसाका परमेश्वर है वही मुहम्मदका भी है। फिर मोहम्मदी ईसाइयों और मूसाइयोंसे क्यों वैर रखते हैं? अपने उत्पत्तिकालमें मुसलमानोंने ईसाइयोंको अत्यन्त कष्ट पहुँचाया था। लाखों निर्दोष हिन्दुओंको मार डाला, क्या परम दयालु परमेश्वरकी यही आज्ञा थी? मुहम्मद साहबकी त्रुटि तो तभीसे दूर होगई जबसे कबीर साहबने उनको सत्पुरुषका दर्शन करवाया था। कौन बुद्धिमान तथा दूरदर्शी है जो अपनी त्रुटिको जाने उससे दूर भागे? वही पुरुष प्रशंसनीय है जो ईर्षा छोड़कर न्यायदृष्टिसे देखे। उसीको दोनों जगह बढ़ाई मिलती है।

समस्त मनुष्योंका परमेश्वर एक है दो परमेश्वर नहीं यदि दो परमेश्वर होते तो विभिन्नता होना क्या आश्चर्य न था? जैसा कि, परमेश्वर कुरानमें आज्ञा करता है।

एक परमेश्वर पर कुरान।

رَبُّكَانِ فَبِشَكَرِهِمْ أَلَا اللَّهُ لَفَسْتَغْفِرُ

अनुवाद—यदि होते मध्य आकाश तथा पृथ्वीके अनेक परमेश्वर अल्लाके अतिरिक्त वास्तवमें टूट जाते दोनों अर्थात् पृथ्वी और आकाश।

कारण यह कि, जितने विद्वान् तथा बुद्धिमान् हैं सबके सबका निश्चय विद्यापर स्थिर है। उनको ऐतुलयकीन और हककुलयकीनकी श्रेणी प्राप्त नहीं हुई। इन तीनोंको तीन डंडेकी सीढ़ी मानलो। जबलों एक डण्डे परसे अपने पैरको न उठावे तबलों ऊपरके डण्डेपर पैर नहीं रख सकता। सहस्रोंके साथ ऐसी घटना हुई कि, जब इन लोगोंको बंदनाका आनन्द मिला तब पुस्तकोंको फेंक दिया। मौलवी रूम और शाहबूअली कलन्दर आदिके समान बंदनाका स्वाद पाकर पुस्तकपाठको तुच्छ तथा नितान्तही निस्सत्त्व माना। अतः समस्त बुद्धिमान् विद्वान् जो केवल पहले डण्डेपर खड़े हैं, परमेश्वरके तत्त्वको क्या समझ सकते हैं? ऐसाही विषयानन्द, भजनानन्द और ब्रह्मानन्द। जबलों