भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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बातको मानते हैं, यही बात प्रमाणित करते हैं और दोनोंहीकी एकही सूरत और एकही वास्तविक ढङ्ग है ।

प्रलयकी समानता ।

इस बातपर तनिक भी विचार न करके यहूदी, ईसाई और मुसलमान तीनों भ्रममें पड़े हुए हैं जो कहते हैं कि, मनुष्यकी बुराई भलाईका निर्णय महा-प्रलयके समय होगा । इसका यह कारण कि, आज मनुष्य परमगतिको प्राप्त हो, उसका हिसाब आजसे कोट्यानुकोट वर्षके उपरान्त हो दोनोंका प्रलय तथा महाप्रलय पृथक् पृथक् तथा एकही स्वरूपके हैं । ब्रह्माण्डका प्रलय तब है जब समस्त मनुष्य पापसे भर जाते हैं । जब पापिष्ठी हुए तब मृतक समझे जाते हैं । पापोंके कारण भयानक चिह्न भी परिलक्षित होते हैं । सबके सब मटियामेट भी होजाते हैं । यह ब्रह्माण्डका प्रलय तथा महाप्रलय है । पिण्डका प्रलय तथा महा-प्रलय उसके साथ है । पिण्डका प्रलय तो तब है जब मनुष्य मृत्युशय्यापर पड़ता है, जब वह न जीवित रहता न मरही जाता है, उसके भीतर बाहरी समस्त बल स्थिर होजाते हैं । आँख तो रहती हैं, पर सूक्ष्मता नहीं । कान खुले रहते हैं, पर सुनता नहीं, जिह्वा रहती है, पर बोलता नहीं । श्वास चलता रहता है, पर मुरदा समझा जाता है । केवल देखनेके निमित्त वह जीवित समझा जाता है नहीं तो मुरदा हो चुका । न मुर्दोंमें एवं न जीतोंमें ही गिना जाता है । यह पिण्डका प्रलय है । जब शरीरसे प्राण पृथक् होगा तभी महाप्रलय होती है ।

पाप पुण्यका हिसाब ।

जब कोई मरता है उसी समय उसका हिसाब होता है । पिण्डका प्रलय जब होता है उसीको मुसलमान लोग कब्रका कण्ट कहते हैं । प्राण निकलनेके समय यह नरक वेंकुण्ठ कण्ट सुख सबका अनुभव कर लेता है । जबलों जीवका हिसाब नहीं होता इस मध्यवर्ती समयमें यह सब कौतुक देखता है उसको ऐसा जान पड़ता है कि, मेरे भोजनके निमित्त उत्तमोत्तम पदार्थ और आनन्द सम्भोग के सामान हैं भले ये आदमियोंको दिखलाई देते हैं । जो पापिष्ठी होता है, उसको भयानक नरककी समस्त यंत्रणाएँ दिखाई देने लगती हैं । नरक तथा वेंकुण्ठका समस्त कौतुक दिखलाई देता है । हिन्दू धर्मावलम्बी तथा मुसलमान लोग इस कब्रके कण्टको सविस्तार रूपसे कहा करते हैं । जब जो कोई मरता है उसी समय उनकी भलाई बुराईका हिसाब होता है । ऐसा नहीं कि, आज मरे और हिसाबके निमित्त ब्रह्माण्डके महाप्रलयमें पाप पुण्यके लेखोंकी आशा रखे । यह केवल भ्रम मात्र है । हाँ ब्रह्माण्डके प्रलयके साथ जितने जीव मिटेंगे उनके लेखाका