कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 518, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंहै वह बच्चा तुमको तुम्हारे प्रश्नोंका उत्तर देगा। तब वह साधु भयभीत होकर कहने लगा कि, महाराज ! यह कार्य मैं कदापि नहीं करूँगा क्योंकि, दो स्थानों-पर आपका नाम लेकर मैं कौतुक देख चुका हूँ। कुतिया और भङ्गीका बच्चा मर गया। अब फिर मैं राजाके बालकके सामने जाकर आपका नाम लूँ वह भी मर जावे तो वो मेरी बुरी गति बनावेगा। तब कबीर साहबने कहा कि, वह राजकुमार कदापि नहीं मरेगा। तुम निडर होकर जाके उससे पूछो। तब वह साधु उस राजकुमारके समीप गया। कबीर साहबका नाम लेकर अपना प्रश्न किया, उस समय वो राजाका पुत्र बोला कि, ए साधु ! तू कान लगाकर सुन मैं उस कुतियाका अबलक बच्चा हूँ जिसको पहले तूने कबीर नाम सुनाया था। उस नामके सुनतेही मेरी कुत्तेकी देह छूट गयी मैंने भङ्गीके घर जन्म पाया। पशुसे मनुष्य हुवा फिर तूने जाकर जब मुझे कबीर नाम सुनाया तब मेरी भङ्गीकी देह भी छूट गयी उसी नामके प्रभावसे अब मैं बादशाहका पुत्र हो गया अब मैं इस देहद्वारा परम धामको सिधार्हूँगा फिर कदापि आवागमन न होगा। अतः जिस जीवपर इस सत्यपुरुषकी दया हुई वह पशुभी इस सीमापर्यन्त पहुँच गया, मनुष्यकी तो गणनाही क्या है। यह बात सुनकर नामकी श्रेष्ठता स्वच्छसुसे देखकर वह साधु आकर कबीर साहबके चरणोंपर गिरा। इस सत्यपुरुषकी कृपाकटाक्षही मनुष्यके लिये यथेष्ट है दूसरी बात कुछ भी नहीं है। वही सत्य-गुरु सबका कर्ता धनी है। चाहे तो एक पलमें समस्त संसारको मुक्ति प्रदान कर दे। दूसरे किसीमें यह सामर्थ्य तथा वश नहीं जो कि सब कालपुरुषके जालमें फँसे हैं।
ज्ञानीजीके नाम।
सत्य सुकृतजी, मुनीन्द्रजी, करुणामय स्वामी, कबीर साहब ये चारों नाम तो चारो युगमें अधिक प्रसिद्ध होते हैं। पर समस्त नामोंसे आपकी प्रशंसा वेद, पुराण, ऋषि, मुनि पीर, पैगम्बर इत्यादि करते हैं। अनगिनतीनामोंमें से कुछ नाम ये हैं :—
ज्ञानी, अमर, अमर, अचिन्त्य, अक्षय, अविनाशी, आदिब्रह्म, अम्मर-पुरवासी, अदली, अमी, अनेह, अजावन आदि, सत्यमत, परमानंद, अखिल-सनेही, सत्य नाम, सत्यपुरुष, विदेही, निष्कामी निहंकर, अविगत, अगम, अपार, अनन्त, अभेद, अचल, अक्षय, अगोचर, अलेख, अभय, अवगाह, पुरुष-पुराण, हंसपति, हरम्बरमण, भवसागरतारन, अरूप, अथाह, अनाजदराता, सच्चिदानन्द, योगसंतायन, सुखसागर, सुरतनाम, अंकुर, शुभदानी, प्रथम-