भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

पृष्ठ 519, कुल 1367 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 519

पुरुष, अम्बूद्वीप, पुरुषोत्तम, सर्वमयी, साधुमति, भक्तराज, सत्यसन्तोष, स्नेही शब्दरूप, अविचलदेही, प्राणनाथ, अमृतवाणी, सत्यलोकपति, सत्यगुरु, जन्मनिवारन, वन्दीछोड़, बंदमुगतावन, शीलरूप, धर्मरायशिरमर्दनहार, मुक्तिदाता, राज्यनायक, शीतलउजियारा, परायण, अस्थिरनाम, अभयपददाता, सत्यसाहब, अक्षयवृक्ष, पुष्पद्वीपमण्डन, गुरुसाचा, हंससोहृद्भम्, सोहृद्भशब्द, कण्डहार, शठहार, इच्छारूप, ज्ञानबीज, अमोल, अबोल, अशोच, धीर, अन्तर्यामी, परिचय, विदेह सहीछाप, गुप्त, पोहृद्भ, विहृद्भ, निःशब्द, विषहर, शब्द सत्यशब्द, अजावन, निःसत्त्व, विहृद्भम्, अग्र, उम, अजीत, अर्ध अजीत, अर्ध स्थिति, संजीवन, निर्गुण, आदिऋषि, सत्यसमर्थ, गङ्गपुरुष, योगजीत, सधिक नौतम, मुक्तामणि, चूडामणि, सुकृत, धर्मऋषि, जन्दा इत्यादि अनगिनती नाम हैं। इतने नाम तो मने, कबीर एकोत्रीसे नकल किये हैं। अरब और फारसके लोग आपको सैयद अहमद कबीर और शेख कबीर कहते हैं। आप अविनाशी इत्यादि नामोंसे ग्रंथोंमें प्रसिद्ध हैं।

शेर—नहीं नाम जिसके पायान है। सिफ़तस सब उसीकी हिंशायान है ॥
जो बेचूँ चुरा नामनामी हुवा। वह सब अञ्जियामें गिरामी हुवा ॥
लताफ़तकी छोड़ा कसाफ़त लिया। जहाँ की बला और आफ़त लिया ॥
नहीं नाम जिसका न कोई मुकाम। बहर जाय मौजूद हर शैनदाम ॥
जो है लाबयों उसका दारुलकरार। मुजस्मिम हुवा नाम है बेशुमार ॥
मुकद्दस कुतुब वेदबानी बयान। जो देखे पढ़े उसको हो सब यान ॥
जहाँ में जो मशहूर युग चार हैं। जुदा नाम उसके बहरबार हैं ॥
अब औव्वल यही मानना चाहिये। कबीर गुरु किसे मानना चाहिये ॥
हुए और हैं कते कबीर। वही सबका हादी है पीरान पीर ॥
जो औव्वलमें पैदायश इबतदा। परम आत्मासे हुई यह नदा ॥
पुरुषने इसे पहले ज्ञानी कहा। व मुखलूकपर हुकमरानी कहा ॥
पुरुष और ज्ञानी हो सूरत हुए। लताफ़त कसाफ़तकी मूरत हुए ॥
वह खुद आपको पुरुषज्ञानी किया। जगत जीवकी मेज़बानी किया ॥
वह अव्वलमें ज्ञानी व आखिर कबीर। मुबर्दा हुवा हिंस रोशन जमीर ॥
जमीमें फुँगा और नालः हुवा। यह दिल देव दुःखका कबला हुवा ॥
किते नामोंसे खुदको मशहूर कर। वह जाहिर हुवा जगतमें रूपधर ॥
वही खलकका आफ़री निन्दः है। वही बन्दः आसीका बर्खाशन्दा हैं ॥