भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 520

मुखम्मस तरजीअबन्द ।

नहीं कोई शुक्र हकका हक अदाकी । न जाने भेद इस साहब सदाकी ॥
जो हाशै खबर देरहे वकाकी । दिखावै राह उस गयाव खुदाकी ॥

सिफत क्योकर करूँ इनसों हूँ खाकी ।

तु है सत-पुरुष और ज्ञानी गुरु है । हम मौजूद सबके रुवरू है ॥
कि गुल ओ खारमें सब तेरी बू है । जहाँ देखो वहाँही तूही तू है ॥ सि० ॥
जितने सिद्ध साधु पैगम्बर जहाँके । करें सब वस्फ उस क्षाहैं शहाँके ॥
न जाने भेद इसरारे निहाँके । कहाँ घर और चले रहले कहाँकी ॥ सि० ॥
फिरिस्तः आदमी और आविदाँ सब । न जाने कोइ तुझ हम दोसना ढव ॥
हैं कहते सारेत खालिक मेरा रवाकरे । क्योकर करम किसतौर और कब ॥ सि० ॥
तु है खालिक व मालिक आलमोंका । तुही रहबर है मुनासिफ़ जालिमोंका ॥
करे तू काम पूरा आशकोंका । अँधेरा घर बनाया फासिकांका ॥ सि० ॥
थके गुण गावते शेष और शङ्कर । विसराह नारदो उलसाय बरतर ॥
खड़े सब दस्त वस्तः तेरे दरपर । तु है मल्लाह और अल्लाह अकबर ॥ सि० ॥
भटकता फिरता था ए खिज्ज मेरे । रहीमा रहम आइ दिलमें तेरे ॥
पडा खाना था गीत जमके घेरे । इस आजिज को चढ़ाया आने बेड़े ॥ सि० ॥

मुसद्दस ।

अहदो पैमान आदिमें लाया । देह नर धरके आ किया दावा ॥
कालने जगत जीव धर खाया । मुक्तिकी युक्ति सबको बतलाया ॥
नाम तेरो तुफ़्फ़्ज़ ज़मदर है । अकबर अकबर कबीर अकबर है ॥
लोक तीनोंमें काल घेर किया । रहम करते न आप देर किया ॥
मार दुश्मनको उसने ज़ेर किया । दोस्त अमृत पिलाके सेर किया ॥
शब्द शमशीर ढाले बकतर है । अकबर अकबर कबीर अकबर है ॥
धोखेके धूलको उडा डाला । कुफ़ औ शिर्कको मिटा डाला ॥
सारे जाहँर पर दया पाला । देश देशोंमें की नयी चाला ॥
चीन तुकोँ फिरङ्ग बर बर है । अकबर अकबर कबीर अकबर है ॥
कालके जालको वही तांडे । नाम नरमान हब्बसो जोडे ॥
कर्म औ भर्म भाँडेको फोडे । तीरतकदीरको वही मोडे ॥
सत्यनाम पयाम घर घर है । अकबर अकबर कबीर अकबर है ॥
जो हुवा खाककबर करके दूर । हिलमुनोवर हुआ है उसके नूर ॥