कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 533, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंकथितो ज्ञानध्यानेषु बीजमंत्रसुसंग्रहः ।
राजीवलोचनश्चेह यत्कबीरः स चोच्यते ॥
जो (क) ज्ञान और ध्यानका देनेवाला है । (ब) बीज मंत्रोंका मुख्य-स्वरूप है । (र) कमलरूप है उनको शब्द कहते हैं उसीको कबीर कहते हैं ।
कुरुते नित्य ज्ञानं च विमला निर्मला मतिः ।
रमणीयः सदाचारो यः कबीरः स चोच्यते ॥
(क) उसका ज्ञान सदैव स्थिर और नित्य है । (ब) वैराग्य होता है । (र) ऋद्धि और सिद्धि पवित्रता देनेवाला है । एक स्वरूपसे बहता है, उसको कबीर कहते हैं ।
कः कलौ केवलः सार्थो विद्वेषपरिकीर्तितः ।
ऋद्धि शुभसमासेन यः कबीरः स चोच्यते ॥
(क) कलियुगमें जीवोंके साथ है । (ब) बोधरूप होकर पापोंका नाश करता है । (र) सबके हृदयोंमें मिल रहा है । उसको कबीर कहते हैं ।
कः कलौ सर्वकल्याणं विवेकज्ञानसंहितम् ।
रागयुताहृता वार्ता यः कबीरः स चोच्यते ॥
(क) कलियुगमें जीवोंको कल्याण देता है । (ब) विवेक तथा ज्ञानके साथ संयुक्त हो रहा है । (र) प्रेमके साथ सबमें रम रहा है । उसको कबीर कहते हैं ।
कविः पुराणः वपुषो विदेहो देहवान्सुधीः ।
गुरुयोगी सुराणां च यः कबीरः स चोच्यते ॥
(क) जो है सो स्वयम् चैतन्यस्वरूप है उसका आरम्भ तथा अन्त कुछ नहीं । विदेहसे भी दूर है और उसके साथ भी है । (र) ज्ञान स्वरूप है समस्त देवताओंको गुरु है उसको कबीर कहते हैं ।
कबीनां प्रवरौ ज्ञाता धाता माता पितामहः ।
जनकः सर्वलोकानां यः कबीरः स चोच्यते ॥
कबीर नाम है अत्यन्त उत्तम श्रेष्ठ तथा सबका जाननेवाला है । सबका पिता है, पितोंका पिता है । समस्त संसारका रचयिता है । (र) सबका जाननेवाला है उसको कबीर कहते हैं ।
असद्भा इदमग्र आसीत् ततो वै सदजायत ।
तदात्मानं स्वयमकुरुत तस्मात्तत्सुकृतमुच्यते ॥
यह जगत् अपनी उत्पत्तिसे पूर्व अव्याकृत नामरूपवाला था, इसीसे यह