भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 532

कः कमनीयो भावेषु विसर्गः सर्वभावनः ।

रः सशान्तः समाधानो यः कबीरः स चोच्यते ॥

(क) अक्षरसे यह तात्पर्य है कि, जो समस्त गुणोंसे पूर्ण है । (बी) समस्त संसारका रचयिता तथा स्वामी है । (र) आनन्द स्वरूप है, उसको कबीर कहते हैं ।

कलौनाम प्रिये प्रोक्तं विवर्णं यागधारणम् ।

रागद्वेषपरित्यागी यः कबीरः स चोच्यते ॥

(क) प्रेम और प्रेमसे उत्पत्ति करनेवाला तथा (बी) सब ओर देख रहा है । (र) मैत्री तथा विरोधसे पार है उसको कबीर कहते हैं ।

कमलोद्भवसंभूतौ वीक्षते मृदुमंजुलः ॥

समर्थः सर्वलोकानां यः कबीरः स चोच्यते ॥

(क) कमलसे उत्पन्न हुआ, कमलोंके दलोंसे प्रगट हुआ । (बी) देख रहा है, समसृष्टि है, (र) सर्वलोकमें समर्थ है, उसको कबीर कहते हैं ।

मुक्तिमार्गविनोदश्च भक्तिमार्गललामयः ।

रसनामृतमूलेषु यः कबीरः स चोच्यते ॥

मुक्ति तथा सत्यका दिखानेवाला है । भक्ति पक्षका उजियारा करनेवाला है । जो अमृतका निचोड़ है, उसको कबीर कहते हैं ।

कंटकैभ्यो विनिर्मुक्तो विश्वासोच्छ्वास एव च ।

रमन्ते सर्वभूतानि यः कबीरः स चोच्यते ॥

(क) दुःख तथा कष्टसे अलग (बी) श्वासमें होकर जगत्में जगत् रूप हो रहा है । (र) समस्त जीवोंको आनन्द देनेवाला है, उसको कबीर कहते हैं ।

कैवर्तः सर्वलोकानां विदेहस्य प्रकाशकः ।

रजनी भव उत्साहो यः कबीरः स चोच्यते ॥

(क) समस्त संसारका मल्लाह है । (बी) देहका प्रकाश करनेवाला है । (र) ज्ञानरूप है । यानी संसार सागरसे पार उतारनेको जो खेवट है उसीको कबीर कहते हैं ।

कपाटस्यपटच्छेता विचारः परमार्थकः ।

रागद्वेषविनाशश्च यः कबीरः स चोच्यते ॥

जो (क) अज्ञानके द्वारोंका तखता तोड़नेवाला है (बी) परमार्थरूप है, परमार्थके निमित्त है । (र) मैत्री तथा विरोधको पृथक् करनेवाला है, उसे कबीर कहते हैं ।