भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 545

एक हंस कबीर परमेश्वरका पूजन जानते हैं अन्य किसीको सुध नहीं है । कबीर साहबके हंस दो प्रकारके हैं—एक तो वे लोग हैं, जो सत्यलोकमें हंस आनन्दमग्न हो रहे हैं । दूसरे वे जो लोमश ऋषि तथा कागभुशुण्ड इत्यादिके सदृश हैं जो सदैव संसारमें रहकर संसारके हेरफेरको देखा करते हैं । पर संसारकी कामनाओंसे पृथक् हैं । सांसारिक आनन्दोंकी कांक्षाओंका प्रभाव उनपर तनिक भी नहीं होता । जैसे जलमें कमल रहता है पर उस पर जल असर नहीं करता, ऐसेही हंस कबीर सदैव स्वच्छ निर्विकार रहते हैं । हंस कबीरोंका शरीर पक्के तत्त्वका है । इस कारण उनका कभी भी आवागमन नहीं होता । इसी विषय पर कबीर साहिबने कहा है कि—

शब्द—हंस उड़े बक बैठे आई । रैन गई दिन हूँ चल जाई ।

काचे करवे टिकै न पानी । हंस उड़े काया कुम्हलानी ॥

हंस सत्यलोक चला जाता है, बगुला संसारी यहीं रह जाता है । क्योंकि कच्चे करुएमें पानी नहीं टिकता, हंस उड़ जाता है, शरीर यहीं रह जाता है ।

लोमश ऋषि ।

लोमश ऋषि भी कबीर हंस हैं । सहस्रों बेर ब्रह्मा विष्णु और शिवका जन्म मरण होता है, सहस्रों बेर उत्पत्ति स्थित तथा विनाश हुआ करता है पर आप सदैव एकही तरह रहते हैं । आपका जन्म मरण कभी नहीं होता, आप सदैव आनन्दसे रहते हैं, आपको कभी किसी प्रकारका कष्ट नहीं होता है । जब अग्निकी वर्षा होती है, तब आप अग्निस्वरूप हो जाते हैं । जब वायु अधिक हो जाती है, तब वायुस्वरूप हो जाते हैं । जब जल अधिक होता है, तब आप जल बन कर जलपर तैरते फिरते हैं । ये लोमश ऋषि बड़े प्रसिद्ध हैं । आप सदैव पृथ्वी पर रहते हैं । प्रायः लोग आपको जानते हैं । जब यह जगत् शून्यमें समा जाता है, सब कुछ शून्य हो जाता है तब आप शून्यस्वरूप होकर शून्यमें समा जाते हैं । जब सृष्टिकी उत्पत्ति होती है तब फिर आप पृथ्वीपर आ विराजते हैं । आप सदैव संसारकी सैर किया करते हैं । जब जब कबीर साहब पृथ्वीपर प्रगट होते हैं, तब तब आप सत्यगुरुके चरण चूमते हैं । जब आप प्रगट होकर घूमा करते हैं, तब सब कोई आपका दर्शन कर सकते हैं । जब आप छिप रहते हैं, तब आपका दर्शन दुर्लभ हो जाता है । कभी कभी अजनबीके सदृश कहीं कहीं प्रगट होते हैं और छिप जाते हैं । इस कलियुगमें ऐसे ऋषि मुनि अब छिप रहे हैं । क्योंकि यह समयही बड़ा पापिष्ट है । संस्कृत भाषामें लोम नाम बालका है । महाप्रलयमें एकही लोम इनका गिरता है इस कारण आपका नाम लोमश ऋषि है । (मैंने