कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 580, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंतब सब जिलि मिलि दीन रेगाई^१^। पुष्कर छेत्र पहुँचे^२^ जाई^३^ ॥
सवालाख दीपक उँजियारा^४^। सब परछाही^५^ आप^६^ निहारा^७^ ॥
बैठे देख सकल सरदारा। सुर नर भूपति ठाढ़े पारा^८^ ॥
सकल मेष^९^को देखहु देवा। जलमट्ट^१०^ रूप^११^ कहहु कस^१२^ भेवा^१३^ ॥
साखी-सब परछाई निरखह^१४^, सुनहु युधिष्ठिर राय।
कहहु^१५^ सुपच कस^१६^ आगरे^१७^, जलमह^१८^ निरखहु जाय^१९^ ॥
युधिष्ठिर बचन।
चौ०- निरखे^२०^ राय युधिष्ठिर छाहि^२१^। पशुकी छाया सबकी आहि^२२^ ॥
खर^२३^ शूकर^२४^ लीन्हें औतारा^२५^। श्वानजन्म^२६^ भरमें^२७^ मनियारा^२८^ ॥
सा०- मीन^२९^ माँस जो खात^३०^ है, ते तो जाति चँडाल।
गीध^३१^ कागकी^३२^ देह धरि^३३^, भरमें जग^३४^ जञ्जाल^३५^ ॥
जब समस्त समाजको समेटि कर राजा युधिष्ठिर तथा कृष्णजी पुष्कर तीर्थ गये। कृष्णजीने सवालाख प्रदीप जलवाये, युधिष्ठिरजीसे कहा कि, अब तुम लोग आदिमियोंको परछाई इस जलमें देखो, उन्होंने देखा तो सर्व मनुष्योंका प्राकृतिक स्वरूप उस जलमें दिखाई दिया अर्थात् गदहा, सूबर कुत्ता, बैल, हाथी घोड़े पशु, पक्षी हंसक जीव कीड़े मकोड़े आदि देख पड़े, एक भी उनमें मनुष्य नहीं था केवल श्वपच सुदर्शनजी महाराजही इनमें मनुष्य थे, श्रीकृष्ण का सत्य पुरुषका रूप था। जब पाण्डवोंने स्वचक्षुसे देख लिया कि सुदर्शनजीके अतिरिक्त दूसरा कोई मनुष्य नहीं है तो उनको सुदर्शनजीकी श्रेष्ठताका परिचय भली प्रकार मिल गया। पुष्करजीमें सबका प्राकृतिक स्वरूप दिखाई दिया। क्योंकि, पुष्करजी सब तीर्थोंमें श्रेष्ठ हैं, पृथ्वीकी आँख हैं। इस कारण कृष्णचन्द्रने यह समस्त कौतुक धरतीकी आँखद्वारा दिखलाया। सब लोगोंने हंस कबीरकी श्रेष्ठताको भली प्रकार जान लिया। इसी प्रकार हंस कबीरकी सबकालोंमें प्रकट हो जाती है, किसीसे छिपी नहीं रह सकती। उन्हींकी श्रेष्ठतापर यह गजल है इसमें उनकी श्रेष्ठताका कुछ नमूना दिखा देते हैं —
गजल-संद^३६^ मह खुर छिप जायेंगे इस नूरके^३७^ आगे।
तुझ बंदः सुदर्शन कदम^३८^ धूरके आगे ॥
१ चल दिये, २ पहुँच गये, ३ प्रकाशमें, ४ अपनी परछाई को, ५ स्वयम, ६ देखा।
७ किनारेपर ८ दशनोंके, ९ जलमें, १० आकार, ११ कँसा, १२ रहस्य है, १३ देखो, १४ बताओ,
१५ कँसे, १६ आकार, १७ पानीमें, १८ देखो, १९ देखे, २० परछाई, २१ है, २२ गदहा,
२३ सूअर, २४ जन्म लिए हुए हैं, २५ कुत्तेकी योनि, २६ डोलें, २७ चूड़ीवेचा, २८ मछली
२९ खाते हैं, ३० गूढ़, ३१ कऊआ, ३२ शरीर, ३३ संसार, ३४ बखेडेमें, ३५ सूर्य चाँद आदि
३६ आत्मीय प्रकाश, ३७ चरण, ३८ रज।