कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 711, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंकाया नगर नाग एक रक्षित छापा है पाँचों फनके ॥
कहैं कबीर सुनो भाई साधो यहिते मोर पैया झनके ॥
यह मन व्याघ्र सदृश है । इन पाँचों हथियारोंसे सभी जीवोंका शिकार करता है, कोई इसकी पकड़से छूट नहीं सकता, सबको पकड़ पकड़कर खा लेता है । कोई भी ऋषि, मुनि, सिद्ध, साधु इससे बच नहीं सकता । यही मन काल-पुरुष है इसके भेदको किसीने नहीं जाना । मनुष्यका कुछ बल नहीं चलता । जिधरको चाहता है उधरही बुद्धिको फेर देता है । यह मनुष्य विचारा वैसेही कार्य करने लगता है । भलाई बुराईकी ओर झुका देना मनके आधीन है । यह समस्त इन्द्रियोंका राजा है । सभी इन्द्रियाँ मन राजाके सिपाही हैं । केवल एकही इन्द्रिय ज्ञान और कर्म नष्ट करनेको बहुत है । जिसके साथ इतनी इन्द्रियाँ लग रही हैं फिर यह जीव कैसे बच सकता है ? जिधरको यह मन बाद-शाह झुकता है उधरही समस्त इन्द्रियाँ दौड़ पड़ती हैं । यह मन तथा सब इन्द्रियाँ शिकारी हैं कोई जीव इनसे बच नहीं सकता । यह भाव इस निम्नलिखित साखीसे स्पष्ट प्रतीत होता है —
कबीरसाहबकी साखी
काहे हिरनी दूबरी, यही हरियरे ताल ।
लाख शिकारी एक मृग, केतक टारे भाल ॥
ब्रह्माण्ड तथा पिण्ड दोनों एक प्रकारके हैं, बाल बराबर भी विभिन्नता नहीं है । एक बहुत बड़ा अण्डाकार स्वरूप तो ब्रह्माण्ड है, दूसरा छोटा अण्डाकार स्वरूप मनुष्यका शरीर है । दोनोंकी एकही बात है । कुछ विभिन्नता नहीं है । इस बनने ही आवागमनका पथ बनाया और आपही एकसे अनेक हुआ । चौरासी लाख योनिमें मारा मारा फिरता है । जिस पथसे निकलता है उसीमें बारम्बार घुसनेका उद्योग करता है । उसकी तृष्णा कभी कम नहीं होती । उस स्त्रीने पहले ब्रह्मा, विष्णु और शिवको मार लिया फिर समस्त संसारको मारने और खाने लगी । यह बड़ी बलिष्ठ डायन है । यह ज्ञानरूप बच्चोंका कलेजा खाया करती है । इस स्त्रीने अपने छः स्वरूप बनाये हैं । पद्मिनी, चित्रिनी, हस्तिनी, शंखिनी, नागिनी, डाकिनी उनके नाम हैं और इन छः प्रकारकी स्त्रियोंके छः पुरुष हैं । पद्मिनीका पुरुष खरगोश (शशा) है । चित्रिणीका पुरुष हिरन है । हस्तिनीका पुरुष बैल है । शंखिनीका पुरुष गद्दा है । नागिनीका नर घोड़ा है । डाकिनीका जोड़ा भैंसा है ।
इस प्रकार छः प्रकारकी स्त्रियाँ छः प्रकारके पुरुषोंको ढूंढ़ती हैं । जिस स्त्रीको अपनी इच्छानुसार पति मिले वह तो प्रसन्न रहती हैं और उसका कार्य