कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 749, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंईसूकीसी देह मालूम हो । फिर याकूबके हाथमें खाना देकर कहा कि, अब तू अपने पिताके निकट जाकर कह दे कि, ऐ पिता ! मैं तेरा पुत्र ईसू हूँ भोजन ले, खाकर मुझको बरकत दे । तब इसहाकने उसको अपने समीप बुलाया उसके समस्त शरीरको टटोला और कहा कि, बोली तो याकूबकीसी है पर शरीर ईसूकासा है । तब इसहाकने भोजन किया याकूबको बरकत दी । इधर तो याकूब अपने पिताको भोजन कराके और बरकत लेकर चला गया । इधर ईसूभी आखेट मारकर लाया बहुत स्वादिष्ट भोजन पकाकर अपने पिताके निकट लेकर गया कहा कि, ऐ पिता ! भोजन कर और मुझे बरकत दे । यह बात सुनकर इसहाक बोला कि, ऐ पुत्र ! अभी तो तू बरकत लेकर गया था । अब पुत्रः कैसे पलट कर आया । फिर अफसोससे कहने लगा कि, तेरा भाई याकूब धोखा देकर तेरे नामसे बरकत ले गया । यह बात सुनकर ईसू चिल्ला चिल्लाकर रोया और कहा ऐ पिताजी ! मुझको भी बरकत दो । उसका रोना तथा चिल्लाना किसी काम न आया दोनों भाइयोंमें बड़ा विरोध उत्पन्न हुआ ईसूने याकूबको मार डालनेका विचार किया । आगे रक्काकी सलाहसे याकूब घर छोड़कर भाग गया अपने मामू लाबनके घरमें रहने लगा ।
याकूबका व्याह—जब अपने मामू लाबनके घर गया तब लाबनने कहा कि, यदि तू सातवर्षतक मेरी सेवा करेगा तो मैं तुझको अपनी पुत्री दे दूंगा । याकूब अपने मामू लाबनकी सात वर्षतक भेड़ बकरियां चराता रहा । सातवर्ष बीतनेके बाद लाबनने अपनी बड़ी पुत्री, जो कि, आँखोंसे चौँधली थी, रातको धोखा देकर याकूबसे विवाहदी जबरान्तबीत गई और सबेरा हुआ तब याकूबने देखा तो मालूम किया कि, मेरे मामूने तो मेरे साथ धूर्तता की अपनी चौँधरी पुत्री मुझको दी । राहील जो सुन्दरी थी, जिसकी आशापर मैंने सेवा की थी वह नहीं दी । इस बातसे अत्यन्त दुःखी होकर लाबनसे शिकायत प्रगट की । तब लाबनने कहा कि, यदि तू सातवर्षतक मेरी सेवा और करे तो मैं तुझको अपनी दूसरी बेटीभी विवाह दूंगा । तब हजरत सातवर्षतक और अपने मामूकी सेवाकी भेड़ियां चराते रहे । तब उसने अपनी दूसरी पुत्री राहिलको भी याकूबके हवाले किया, इन दोनों पत्नियोंके लिये याकूबने अपने मामूकी चौदह वर्षतक भेड़ें चराई थी । याकूबका ग्यारहवां पुत्र बड़ा सुन्दर था । उसके भाइयोंने उसे ईर्षा वश मारकूटकर कुएँमें डाल दिया । उसका वस्त्र रक्त्तसे भिगोकर याकूबके समीप लेजाकर कहा कि, तेरे पुत्र यूसुफ को किसी हिंसक जन्तुने फाड़ खाया, यह रक्त्तसे भीगा हुआ उसका कुरता देखो । यह बात सुनकर याकूब बधाई मार मारकर रोने लगा हाय हाय करते और रोते