भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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रोते अन्धा होगया । क्योंकि, वह यूसुफको बहुत ज्यादा प्यार करता था । उसे यह तनिक भी ज्ञात नहीं हुआ कि, उसका पुत्र मारकूटा निकटही कूएमें पड़ा है । बिल्कुल नहीं जान सका कि, उसपर कैसी आपत्ति आयी । उनको भी खुदाका दर्शन होता था, खुदासे बातें भी हुआ करता थीं, आप खुदाके प्रियपत्र थे । आपका दूसरा नाम इसराईल था । आपके बारह पुत्रोंसे बारह सरदार, बनीइसराईलके नामसे प्रख्यात हुये । बारहोंकी बहुतेरी सन्ताने हुई । तौरीतमें उत्पत्तिके (३२) बाब(२४) से (३१) आयत पर्यन्त लिखा है कि, याकूब अकेला रह गया था । वहां प्रातःकाल तक एक मनुष्य उससे कुशती लड़ता रहा जब इसने देखा कि वह मनुष्य उसपर विजय नहीं, हुआ, तब इसने उसकी जाँघको भीतरकी ओरसे छुआ और याकूबकी जाँघ उससे कुशती लड़नेमें चढ़ गयी । तब वह बोला कि, मुझको जाने दो सबेरा हो गया । तब वह बोला कि, जब तक तू मुझे बरकत नहीं देगा तबतक मैं तुझको न जाने दूंगा । उससे इसने पूछा कि, तेरा नाम क्या है, वह बोला याकूब वह बोला कि, भविष्यमें तेरा नाम याकूब न रहेगा बरन् इसराईल होगा कि, तून खुदा और सृष्टिमें प्रतिष्ठा पाई । विजयी हुआ । याकूबने कहा कि, मैं तेरी प्रार्थना करता हूँ तू अपना नाम मुझे बता । वह बोला कि, तू मेरा नाम क्यों पूछता है ? उसने उसको वहां बरकत दी । याकूबने उस जगहका नाम फनीआईल रखा कहा कि, मैंने परमेश्वरको स्पष्ट देखा मेरे प्राण बच रहे हैं । जब वह फनी-आईलसे जा रहा था तब सूर्य्य उसपर प्रकाशित हुये, वह लँगड़ा था । इसी कारण बनी इसराईल उस नसको जो जाँघमें भीतरकी ओर है आजतक नहीं खाते क्यों कि, उसने उसको छुआ था जो कि, याकूबके जाँघकी नसके भीतरवाली है । नज्म-नबी ऐसे और ऐसा परवरदिगार । तो फिर क्यों न हों पैरुवा रुस्तगार ।। भरो पेट अपना करो ऐशा जैश । कि, चूँ और चिंगूसे तुझे क्या है कार ।

६ हजरत मूसा-हजरत याकूबके पीछे हजरत मूसाको पैगम्बरीकी पदवी मिली । यद्यपि इस बीचमें दूसरे दूसरे नबी भी हुये, पर हजरत मूसाको अन्यान्य नबियोंसे अधिक श्रेष्ठता है । खुदाने सीना पर्वतपर आपसे वार्तालाप की । जितना खुदा कहता था उतनाही मूसा जानता था । अपने भीतरी प्रकाशका बल कुछ भी नहीं रखता था ।

अहादीससहीहा और सूर किसीमें लिखा है कि, दस वर्षतक मूसा, शईब पैगम्बरकी पुत्रीके साथ विवाह करनेके लिये उसकी भेड़ बकरियां चराता हुआ सेवा करता रहा । उसने अपनी पुत्री सफूराके साथ मूसाका विवाह कर दिया । तौरीतमें लिखा है कि, जब मूसा सीना पर्वतपर खुदासे बातें कर रहा था, उस