भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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दोनों कर्मोंके बन्धन हैं, उनका सदैव आवागमन हुआ करता है। आधिभौतिकसे अन्तर्वाहक और अन्तर्वाहकसे अधिभौतिक हुआ करता है। इसी प्रकार इसका सदैव आवागमन हुआ करता है। इसस अब स्पष्ट प्रमाणित हो चुका कि जिसको मुहम्मदी पवित्रात्मा समझते हैं वह अपने पूर्वजन्मोंके कर्मोंसे अशुद्ध लिंग देही थी, अनगिनती जन्मोंके कर्मोंमें बराबर बँधी चली आती थी। कर्मका बन्धन देहके बिना नहीं हो सकता। कितने जन्म पूर्वसे मुहम्मदकी आत्मा आवागमन करती चली आती है एवं भविष्यको भी करेगी इसको भ्रम तथा भूलसे मनुष्य पवित्रात्मा समझते हैं।

३१-भाग्यानुसारी वस्तु-मुहम्मद साहबने अपनी उम्मतको यह सिखलाया कि, खुदाने सबके भाग्यको पृथ्वी और आकाशकी उत्पत्तिसे पचास सहस्र वर्ष पूर्वसे ही स्थापित किया है। यह वृत्तान्त मशकात बाबुलतकदीर अबदुल्लाह, इब्र मुसल्लमकी हदीस और उनके विश्वासमें यों लिखा है :—

وَالْقَدَرُ بِأَخْلَدٍ حَتَّى مِنْ اللَّهِ تَقَالِي

अर्थात् भलाई तथा बुराई भाग्यमें खुदाकी ओरसे होती है। इसी बातम मुसल्लमसे यह हदीस है।

قَالَ كُتِبَ عَلَى الْإِنْسِ أَدَمُ نَصِيبُهُ مِنَ الزَّانِ مَدَّةُ الْأَحَالَةِ

अर्थात् लिखा गया है खुदाकी ओरसे मनुष्यका भाग। व्यभिचारमें सो वह अवश्यही करेगा। फिर इसी बाबमें अबीदरबाका कथन है :—

اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ دَرَجَةٌ إِلَى كُلِّ عَبْدٍ مِنْ خَلْقِهِ مِنْ حُسْنِهِ مِنْ الْجَلِيلِ وَعِلْمِهِ وَمَجْدِهِ وَآثَارِهِ وَرِزْقِهِ

अर्थात् वन्दाके विषयमें पाँच बातोंमें खुदा निश्चित हो चुका है। मृत्यु, कर्म, स्थिति, फिरनेका स्थान, रोजी। इस विश्वासको हृदयस्थ करनेके निमित्त इतना आग्रह है कि, तकदीरसे विमुखता करनेवालोंसे मुसलमानका व्यवहार रखना भी अनुचित है। इसी विषयमें इब्रउम्रका कथन है। फरमाया हजरतने कि, तकदीरको न माननेवाले लोग मेरी उमतके मजूसी (एक फिरका) लोग हैं यदि वे रोगी हों तो उनका हाल भी न पूछो यदि वे मर जाय तो उनके शवके साथ भी मत जाओ।