कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 790, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंतफसीर काबानीमें आया है कि, खुदा प्रतिदिवस तीन सौ साठ बार लौह महफूज पर दृष्टि करता है। जो चाहता है वह मिटा डालता है जो चाहता है बना देता है।
तफसीर हुसेनीमें लिखा है कि, जिस समय कुछ रात शेष रह जाती है तब खुदा लौह महफूज पर दृष्टि डालकर जो चाहता है वही बना देता है।
अबदुल्ला बिन अब्बास भी कहता है कि, खुदाने जो मुकद्दर किया है उसमें कदापि बदल बदल नहीं हो सकती। परन्तु रिजक, भौनस, सआदत और शकावतमें।
फखरुद्दीनने तफसीर कबीरमें लिखा है कि, आयत महो और असबातमें दो कौल हैं। प्रथम तो यह कि, महो और असबात दो वस्तुओंमें संयुक्त हैं। जैसे खुदाताला महो करता है रोजी और ज्यादा करता है। रोजी अजल, सआदत, शकावत, कुफ्र और ईमानकी भी यही दशा है। दूसरी यह कि, खुदा बन्दोंका हिसाब लिखता है। अतः जिस समय बन्दाने तोबा की तो वह तुरन्त ही उसका दोष मिटा देता है। जब वह दान देता है तुरन्त ही उसका कष्ट निवारण कर देता है।
समीक्षा—अब यहाँ विचार करना चाहिये कि, ऊपर लिखी पाँच बातोंपर समस्त व्यवहार परमार्थका आधार है। इन पाँच बातोंसे खुदाका कोई सम्बन्ध नहीं है। फिर किन बातोंसे उसका सम्बन्ध रखना समझा जावे, पाँचों बातें हमारे मायानुसार हैं फिर खुदा कौन है और हमसे क्या सम्बन्ध रखता है। किस बातमें हमारी सहायता कर सकता है? यह नहीं मालूम कि, मुहम्मदी भाग्यको क्या समझते हैं। आपहीतो खुदाको हमारे कार्योंसे अलग और बेत-अलुक बताते हैं आपही कहते हैं कि, खुदाने उत्पत्तिसे पचास सहस्र वर्ष पूर्व सबका भाग्य ठहरा दिया है। यह कैसे भ्रम तथा भूलकी बात है। फिर ऐसे अन्यायी खुदाकी बन्दना कौन करे। जब खुदाने पूर्वसे मनुष्यका भाग्य लिख रक्खा तो फिर अलग अलग कैसे ठहरा। किसीको भला तथा किसीको बुरा किस कारण बनाया यह अन्याय, क्यों किया। मुसलमान बेसमझीके धोखेमें पड़े हैं। यदि वे पूर्व देहसे उस देहमें आवागमन भी स्वीकार करें तो वस्तुतः उनकी बातें ठीक ठहरतीं।
३२—कयामतके दिनकी तीनबातें—कयामतके दिनके विषयके बाबमें तीन बातें लिखी हैं। प्रथम कहा है कि, कयामत (महाप्रलय) का एक दिन