भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पचास सहस्र वर्षके समान होगा । दूसरे स्थानमें लिखा है कि, एक सहस्र वर्षका होगा । फिर तीसरे स्थानमें लिखा है कि, पल झपकते कयामत (महाप्रलय) बीत जावेगी । यह तीनों बातें स्वीकार की नहीं जा सकतीं । जबतक तीन बार उत्पत्तिका होना स्वीकार किया न जावे । इसका तात्पर्य तो यह है कि, कयामत (महाप्रलय) का दिवस तो अवश्य ही पलके पलमें बीत जावेगा । कभी तो कयामत (महाप्रलय) के पीछे पचास सहस्र वर्षके उपरान्त संसारकी उत्पत्ति होती है और कभी सहस्र वर्ष पीछे । कभी कयामत (महाप्रलय) के उपरान्त उसी समय तनिक भी विलम्ब नहीं लगता । नवीन सृष्टि प्रगट होती है । अनेक कालतक शून्य रह जाता है । यही बात स्वीकार किये जाने योग्य है । इसी प्रकार बारम्बार उत्पत्ति स्थिति तथा विनाश हुआ करता है । सब जीवोंका आवागमन लगातार चलता रहता है ।

३३—सालिग्राम पूजनेकी प्रतिज्ञा—तफसील मदारकमें लिखा है कि, मीसाकका अर्थ प्रतिज्ञा है । खुदाने आदमको उत्पन्न करके बैकुण्ठमें प्रविष्ट होनेको पहिले बैकुण्ठके द्वारके सामने यह प्रतिज्ञा कराई थी । पर मुबारजुलन-बौवतमें लिखा है कि, भिहिश्तसे निकालनेके समय यह प्रतिज्ञा कराई गई थी । मदारकके अनुसार कदाचित् यह प्रतिज्ञा नाअमानमें ली गयी थी जो उरफातके निकट मक्कामें है, अथवा स्थान नेहारमें लीगई थी जो भारतवर्षमें कोई स्थान है । मआलमबकौलकलबी मक्का और तायफमें यह प्रतिज्ञा ली गई थी । उस प्रतिज्ञाका स्वरूप यह है कि, जब आदम मक्कामें हूज्ज करने गया तब उरफान पर्वतके पीछे मानमें सो गया । खुदाने अपनी कुदरतका हाथ उसकी पीठपर लगाया । आदमके समयसे महाप्रलय तक जो मनुष्य उत्पन्न हुये होते और होंगे चिउंटीके स्वरूपमें सृष्टि कर्मानुसार सब तुरंत बाहर निकल पड़े । उसी समय वे सब युवक बुद्धिमान हो गये । जब वे सब तरुणावस्थाकी पहुँचे उस समय खुदाने पूछा कि, क्या मैं तुम्हारा पालक नहीं हूँ ? वे बोले, कि, तू हमारा पालक है । अतः प्रतिज्ञा यही थी कि, तू हमारा खुदा और हम तेरे सेवक हैं । सभीोंने यह बात स्वीकार करली । खुदाने यह प्रतिज्ञा आदमजादसे ली । उस काले पत्थरको जो काबा घरमें है उनके हाथमें दिया । उस पत्थरको उनके हाथमें सौंपके फिर सभीसे कहा कि, अब तुम मुझको दण्डवत् करो । काले पत्थरको हाथ लगाओ । पर बहुतोंने दण्डवत् किया, बहुतोंने नहीं किया, यह पहली दण्डवत् हुई । दूसरी दण्डवत्में कितनोंने जो नहीं किया था पछताकर दूसरी दण्डवत् की, उनमेंसे कितनोंने : १ पहले किया दूसरोंने नहीं किया । इस कारण चार