कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 79, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंपन्दरहवाँ प्रकरण ॥ १५ ॥
वेदके प्रचारका ब्रह्मा
वेद यह निरञ्जनके हृदयसे निलकर, ब्रह्माके हाथमें गया और ब्रह्माद्वारा वह संसारमें आया, इस कारण वेदका प्रचार करनेवाला ब्रह्मा है दूसरा कोई नहीं । ग्रंथ कबीर बीजककी ३४ वीं रमैनीमें लिखा है —
“चार वेद ब्रह्मा निज ठाना । मुक्तिको मर्म उनहुँ नहि जाना” ॥
इसके अतिरिक्त स्वसम्बेदमें लिखा है कि, वेद प्रचारक ब्रह्मा है और कोई नहीं और वेदोंसे भी भली भांति प्रगट है —
ओं ब्रह्मा देवानां प्रथमःसम्बभूव विश्वस्य कर्ताभुवनस्य गोप्ता ॥
स ब्रह्मविद्यां सर्वविद्याप्रतिष्ठामथर्वाय ज्येष्ठपुत्राय प्राह ॥
अथर्वण वेद मण्डूक उपनिषदकी कथा १
अनुवाद । ब्रह्मा देवताओंमें सबसे पूर्व उत्पन्न हुआ जिसका नाम स्वयम्भू हुआ—वह स्वयंभू अर्थात् संसार रचयिता जिसने पर तथा अपरविद्या, अर्थात् वेदको प्रगट किया—और सबसे प्रथम परमेश्वरका बड़ा बेटा ब्रह्मा उत्पन्न हुआ (अथर्वण वेद मण्डूक्योपनिषद् ।)
“सुभूः स्वयम्भूः प्रथमोऽन्तर्महत्पर्यवे । दधेह गर्भमृत्विगं
यतो जातः प्रजापतिः ॥” यजुर्वेद अध्याय २३ मंत्र ६३ ॥”
अनुवाद — परमेश्वरने सबसे पहले ब्रह्माको उत्पन्न किया, इस ब्रह्मासे समस्त संसार तथा वेद उत्पन्न हुए—इसी कारण ब्रह्माका नाम प्रजापति है ।
“प्रजापते न त्वदेता न्यन्यो विश्वारूपाणि परिता बभूव ॥
यत्कामास्ते जुहुमस्तत्रोऽअस्तव्यममुष्य पितासावस्य
पितावय ५ स्यामपतयोरयीणा ५ स्वाहा रुद्र यत्ते क्रिवि परन्नाम
तमिस्त् हुतमस्यमेष्टमसि स्वाहा ॥” यजुर्वेद अध्याय १० मंत्र २०) ॥
हे प्रजापते ! आपसे अन्य और कोई भी, देव इस संपूर्ण विश्वका प्रजा पालनादिकार्य तथा नानाजाताय वर्तमान भूत भविष्यत् कालविषयी गोचर प्राणियोंके सृजन पालन संहार करनेमें समर्थ नहीं है। इस कारण आपही हमारी प्रार्थना पूर्ण करनेमें समर्थ हो, जिस कामनासे आपके निमित्त हम हवन करते हैं वह कामना हमारी पूर्ण हो अर्थात् त्रिकालमें आपके समान कोई नहीं, इस कारण आपही हमारी प्रार्थना पूर्ण करनेमें समर्थ हो। यह इसका पिता, इस स्थलमें पुत्रको