कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 800, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंकिसका पालन करेंगे क्या सौंपेंगे ? किसको सौंपेंगे ? बँकुण्ठके पर्वतपर मुसलमानोंके बच्चोंकी सब आत्मायें रहेंगी, नहरोंपर पक्षियोंके स्वरूपमें चरा करेंगी, इसको आवागमनके अतिरिक्त और क्या कहा चाहिये ? यदि कोई दूसरी जाति अथवा दूसरे धर्मका मनुष्य कहे कि, मुसलमानकी आत्मा मृत्युके पीछे पशु और पक्षी होता है तो वे असंतुष्ट हों । पर जब वे स्वयम् इस बातको स्वीकार करते हैं तो किससे कहा जावे ? इस बातको मुहम्मदी नहीं समझते कि, जब मानुषिक शरीर छोड़कर पशु पक्षी हो गया तो उससे क्या हीनावस्था होगी । वे लोग स्वजिह्वासे स्वीकार करते हैं मेरे कहनेकी आवश्यकता नहीं, न मैं यह कहना उचित ही समझता हूँ । जिसको वे बँकुण्ठ कहते हैं वह भी एक पृथ्वी है वहाँके वे पशु पक्षी हैं, मुसलमानोंके बच्चे और फिरउनके बच्चे दोनों पशुओंके योनिमें प्रवेश कर गये । फिर काफिर और मुसलमानोंमें क्या विभिन्नता है । शहीदोंकी आत्मायें सब हरे पक्षी होती हैं । हरा-लालश्वेत इत्यादि रङ्गके पशु समान हैं जहाँ उनका भाग्य है चरा करें जहाँ उनका भाग्य राह दिखावे वहाँ बसेरा करें । उनको क्या मालूम कि, खुदा कौन है, कहाँ चरने तथा बसेरा करनेसे क्या लाभ और क्या हानि है । सब प्रकारके पशुओं और पक्षियोंका नियम है कि, दिनभर चरते और साँझको बसेरा लेते हैं । खुदाई सिंहासन हो अथवा मानुषिक सिंहासन हो रातको तो कहीं बसेरा लेनाही पड़ेगा इन ध्यानो तथा विचारोंमें सभी मुसलमान धोखेमें पड़े हुए हैं ।
५१-तारीख मुहम्मदीके अनुसार-हदीसरोजतुलअहबाबके पहले फ़स्लके अन्तमें मुहम्मद साहब कहते हैं—
إِصْلَاحِ طَعْبَةٍ لِي أَرْكَامُهَا
अर्थात् पवित्र पुरुषोंकी पीठोंसे पवित्र माताओंकी पेटोंमें मैं बहुत दिवसोंसे पड़ता चला आता हूँ ।
मुहम्मद साहबका आवागमन—इस प्रकार बराबर होता चला आया है । मुहम्मदी इस प्रकार समझते हैं कि, आदमसे लेकर अबदुल्ला तक सब पिता प्रपितामह आपके पवित्र हों यह बात भी प्रमाणित नहीं होती । क्योंकि, आपके माता पिता पर महाकण्ठ उपस्थित हुआ । यदि कोई विचार करे कि, आदमका वीर्य और मुहम्मदकी आत्मातक इसलाबतअबःसे अरहाम ताहिरामें नुक़ल करता चला आया है तो फिर यह हदीस ठीक न होगी :—