कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 801, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंأَوَّلُ مَخَاطِبِ اللَّهِ تَعَالَى
अर्थात् खुदाने सबसे पहले मुहम्मदके तेजको उत्पन्न किया ।
समीक्षा—यदि खुदाने सबसे पहलेही मुहम्मदके तेजको उत्पन्न किया होता तो आदमके वीर्यसे अबदुल्लाके वीर्यतक मुहम्मदकी आत्मा न आती । वरन् मुहम्मदहीका वीर्य तथा मुहम्मदकाही तेज समस्त संसारमें होता । क्योंकि, एकही शरीर तथा एकही प्राण समस्त संसारमें है । एकको छोड़कर दूसरेमें आत्माका प्रवेश करनेहीका नाम आवागमन है । लिखा गया है कि, खुदाने अपनी आत्माको आदममें फूँका । अतः खुदाकी आत्माने आदममें गमन किया । फिर मुहम्मदकी आत्मा खुदाकी आत्मासे पहले क्योंकर हो सकती है ।
५२ नरकमें देखा—मुहम्मद साहबके अनागतवक्ता होनेके तेरह वर्ष पीछे जब हजरतका मआराज (आकाशपर जाना) हुआ सन्स्त आकाशोंकी सैर करके जब आप फिर मक्केमें आये तब अबु-लहब हजरतजीके चचाने (तारीख मुहम्मदीके अनुसार) पूछा कि, तुमने अपने दादा अबदुल मतलबको कहाँ देखा, आपने उत्तर दिया कि, नरकमें देखा । यह बात सुनकर अबु-लहब जलमरा कि, मेरे पिताको यह नरकमें बताता है उसी दिनसे मुहम्मदका बैरी हो गया ।
समीक्षा—अब यहाँ पर विचारना तथा समझना चाहिये कि, जब मुहम्मद साहबने जाकर सब वैकुण्ठ तथा सब नरकोंको देखा तो सबको भरा पाया । वैकुण्ठके लोग वैकुण्ठमें और नरकके नरकमें थे । यदि कयामत (महाप्रलय) के पीछे लोग वैकुण्ठ तथा नरकको जाते तो वे सब स्थान भरे न होते । जब कि, कयामत (महाप्रलय) के पूर्वही नरक तथा वैकुण्ठको भरे तब कयामत (महाप्रलय) के दिनका हिसाब आज्ञानतासे करें । आवागमन अविश्वान्त प्रवाहित रहता है वैकुण्ठ नरक प्रत्येक समय तैयार रहता है ।
५३—मुहम्मदियोंकी कयामत (महाप्रलय) के स्थानोंमें अनेक प्रकारकी मूर्तियाँ दिखाई देंगी, जैसा जिसका स्वरूप है वैसीही योनि उनके लिये ठहराई गई है । इसी प्रकार उनका आवागमन होगा ।
५४—हदीसोंमें आया है कि, जब कयामत (महाप्रलय) में सब कुछ मिट जावेगा तब उसके पीछे अमृतस्त्रोत आकाशसे आवेगा । सब जीव पुनः जीवित हो जायेंगे । जितने जीव होंगे उतनेही छिद्र सब पृथ्वीपर होंगे समस्त छिद्रोंसे निकल निकलकर सब बाहर खड़े होंगे । कयामत (महाप्रलय) के