भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 864

अकानसे चोर बहुतसा धन दौलत लूट ले गये। सबेरा होते ही चोरको ढूंढ़ा पर पता न लगा। लोग एकत्रित हुये हुल्लड मचा। उस समय वह कुत्ता महाजनका वस्त्र पकड़ कर खींचता था पर लोग कुछ ध्यान न देते थे, अन्तमें लोगोंने मालूम करना चाहा कि, कुत्तेके कपड़ा खींचनेका क्या कारण है कि, यह कुत्ता बारम्बार कपड़ा पकड़के खींचता है आगेको दौड़ता जाता है। कुछ लोग कुत्तेके साथ चले वह उनके आगे आगे चला। नगरके बाहरके एक तालाब पर जा पहुँचा, वहाँ वह तालाबके भीतर घुस गया, गोता मारकर फिर बाहर निकल आया। लोगोंको इशारा किया कि, इसमें सब माल असबाब है। क्योंकि, जब चोरोंने वहाँ माल रक्खा था तब यह कुत्ता देख रहा था। लोगोंने कुत्तेका अभिप्राय जान लिया। तालाबके भीतर घुसकर माल ढूंढ़ने लगे। चोरीका सारा माल तालाबसे निकल पड़ा, महाजन अपना माल पाकर अत्यन्त हर्षित हुआ। एक पत्र उस कुत्तेके गलेमें बाँध कर उससे कहा कि, अब तुम जाओ अपने स्वामीको मेरा यह पत्र दिखाओ। तब वह कुत्ता चला। उसी समय वह पठान महाजनका रुपया लेकर आता था। राहमें वह कुत्ता मिला उसको देखकर पठान अत्यन्त क्रुद्ध हुआ। कहा कि, ऐ कुत्ते ! तूने मुझको महाजनसे झूठा बनाया, मेरी आज्ञाके बिना चला आया। तलवार खींचकर मारी कुत्तेका शिर कट गया। वह पत्र गिर पड़ा जब उसको लेकर पढ़ा तो उसमें लिखा पाया कि, मैंने आपसे दो सौ रुपये भर पाये चोरीका सारा हाल तथा कुत्तेकी निम्नक हलालीकी सब बातें लिखी हुई थी उसको पढ़कर पठान नितान्त ही दुःखी हुआ उस उजाड़में कुत्तेकी पक्की छतरी बनवादी। सुतरां अभीतक वह क्रूर वहां बनी हुई है।

कुत्ताकी योनिमें कर्जी—मैंने सुना था कि, महाजन अपने मृत पिताके लिये तीर्थमें पिण्ड देने गया, सांझके समय एक अपने मित्र महाजनके घर उत्तरा। घरवालेने उस महाजनसे कह दिया कि, रातको सचेत रहना, हमारे घर एक ऐसा बलिष्ठ कुत्ता है जो कि, रातके समय किसी पराये मनुष्यको घरके समीप देखता है तो फाड़ खाता है। उसके कहनेसे मेहमान चौकस रहा। रातके समय उसको पायखाने जाना हुआ। उसने इधर उधर कुत्तेको देखा पर वह कहीं दिखाई नहीं दिया। वह लोटेमें जल भर कर पायखानेके लिये चला। यह देख चारपाईके नीचे बैठे हुआ कुत्ता बाहर निकलकर महाजनके पीछे लग गया। महाजनने पीछे फिरके देखा तो कुत्ता दिखाई दिया। यह देखकर वह बहुत डरा और ठहर गया। उसको भयभीत होते देखा तो कुत्ता बोला कि, भयभीत न हो, पायखाने जा यह बात सुनकर वह और भी चकित हुआ