कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 886, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंउपसम ।
उपसम एक छोटा पांच इञ्चका लम्बा जानवर होता है । यह अमेरिका देशमें उत्पन्न होता है, उसके ऊपर बड़े बड़े बाल होते हैं वे बहुत सुन्दर तथा मुलायम होते हैं । उसको शिकारी पकड़ते हैं वह उनके वशमें आजाता है वह ऐसा कपट करके पड़ जाता है कि, मानों मर गया । शिकारी उसको छोड़ देते हैं । छुटकारा पातेही वह उठकर तुरंत भाग जाता है ।
चूहा ।
उपरोक्त पुस्तकमें एक मनुष्यका हाल लिखा है कि, मैं लंका टापूकी सैर कर रहा था । एक दिन मैंने अपने कुत्तेको चूहे पर छोड़ा । कुत्तेने चूहेको पकड़ लिया । उस समय चूहेको देखा तो मरा हुआ दिखाई दिया । उसके अङ्ग प्रत्यङ्ग ढीले तथा अशक्य जान पड़ते थे उसमें प्राणका तनिक भी चिह्न नहीं था । उसको छोड़ दिया । वह चूहा समय पाकर इतनी जोरसे भागा कि, उसकी गतिको कोई पहुँच न सकता था ।
श्वेत चूहा — जेसी साहब श्वेत चूहोंके विषय पर लिखते हैं कि, पादरी फ्रीमन साहब साँझको घूमनेके लिये बाहर चले जाते थे । उसने ऐसा कौतुक देखा कि, अनेक चूहे एक स्थानसे दूसरे स्थानको चले जाते हैं । वे खड़े होकर कौतुक देखने लगे । चूहोंकी भीड़ उनके समीप होकर चली गई अन्तमें उन्होंने देखा कि, पीछेसे एक बूढ़ा और अन्धा चूहा चला आता है । वह अन्धा अपने मुँहमें लकड़ी पकड़े हैं । लकड़ीका दूसरा सिरको आंखवाला चूहा अपने मुँहसे पकड़े लिये जाता है । अन्धा चूहा सब चूहोंके साथ बराबर चला जाता है वह लकड़ी पकड़ने वाला चूहा अन्धेका पथदर्शक तथा मजबूत रक्षक था ।
एक अङ्गरेजी पुस्तकमें लिखा है कि, नोबिन नामक एक लड़का था । उसको किसी मित्रने बहुमूल्य तेलकी कुछ शीशियां दीं । उसने वे लेकर अपनी कोठरीके एक कोनेमें रख दीं । दूसरे दिवस जाकर देखा तो दो शीशियां खाली थीं । उस समय उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि, यहां तो किसी दूसरेकी पहुँच नहीं थी, मेरी शीशियां कौन खाली कर गया ? वह चुपचाप एक कोनेमें बैठ गया । एक घण्टेके बाद देखता है कि, तीन चूहे एक बिलमेंसे निकल शीशियोंकी ओर गये । उनमेंसे एकने अपने पिछले दोनों पैरोंको भूमिसे लगा अगले दोनों पैरोंसे शीशीको दृढ़ता पूर्वक पकड़ लिया, दूसरा चूहा उसके शिरपर चढ़ गया । अपने दांतोंसे शीशीका ढक्कन खोल दिया । उसने अपनी पूँछको शीशीके भीतर डुबोया