कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 887, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृथिवी पर तीसरे चूहेको चुसाया । इस प्रकार बारम्बार अपनी पूँछ डुबाकर उसको चुसाता गया । जब उस चूहेका पेट भर गया, उसने शीशीको पकड़ लिया । शीशी पकड़नेवाला पृथिवीपर बैठ गया ऊपरवाला उसको तेल पिलाता गया । फिर नीचेवालेका पेट भरतेही ऊपरवाला नीचे आया । नीचेवाला ऊपर गया । इसी प्रकार उस ऊपरवालेने नीचेवालेका पेट भर दिया । इसी प्रकार तीनों पेट भरकर दोनों शीशियोंको खाली करके अपने बिलमें चले गये ।
सन् १८२९ ई० में बहुत बड़ी बाढ़ आयी. लोग बाढ़को टड़न नदीके किनारे पर खड़े देख रहे थे । देखा कि, एक हंस पानीपर पैरता चला आता है उसकी पीठपर एक काला दागभी दिखाई दे रहा है । वह हंस समीप आया । लोगों को उसकी पीठपर एक चूहा दिखाई दिया । जब वह हंस पृथिवीके समीप पहुँचा चूहा हंसकी पीठसे उतरकर भाग गया । हंसकी दयासे बाढ़से बचकर चूहा अपने प्राण बचा सका ।
अमेरिकाके एक मासिकपत्रमें यह हाल लिखा था कि, कुछ अङ्ग्रेज अफसर पोर्टस्मिथके पास आगके निकट बैठे थे, उनमेंसे एकने गाना-बजाना आरम्भ किया दश मिनिट भी न बीते होंगे कि, एक छोटीसी चूहिया निकल आई । लोग देख रहे थे कि, जिस जिस ढङ्गसे राग और ताल टूटता था उसी ढङ्गसे वह कूदती उछलती हुई प्रसन्न होती थी । इसके पीछे चूहिया अचेत होकर गिर पड़ी और मर गई । उसके दुःख दर्दका चिह्न भी जाता रहा कुछ कारण भी न जाना गया कि, क्यों मर गई ।
डाक्टर कारपेण्टर साहबका कथन है कि, एक स्त्रीने अपनी आँखों देखा कि, चूहोंका एक झुण्ड बच्चोंको आगले पञ्जोंमें दबाये एक घरसे दूसरे घर चला जा रहा है । जब वे प्रत्येक सीढ़ीपर पहुँचते थे तो एक दूसरेको बच्चा पकड़ा देते थे । इस प्रकार अगला अपने अगलेको दूसरा अगला अपने अगलेको पकड़ाता, इसी प्रकार सब सीढ़ीके ऊपर चढ़ते और उठाये चले गये । जिस बरतनमें उनका मुँह तथा पञ्चा पहुँच नहीं सकता था, उसमें वे अपनी पूँछ डुबा देते दूसरे साथी चूहोंको चखाते जिसमें स्वाद द्वारा मालूम हो जावे कि, इस बर्तनमें किस प्रकारकी वस्तु है उसका मित्र गन्ध तथा स्वादसे तुरन्तही जान लेता कि, अमुक वस्तु इसमें बन्द है, लेने योग्य होनेपर उसके लेनेकी चिन्ता करते ।
लाहौर जिलेके सुरसिंह नामक गांवमें एक जमींदारकी स्त्रीकी नथ जाती रही । उसने जान लिया कि, कोई चूहा लेगया होगा । उसके जमींदारने मदिराका प्याला भरकर चूहेके बिलपर रख दिया । चूहे मदिरा पीकर प्रसन्न हुए नथ बिलके बाहर रख गये ।